बाल सफेद क्यों होते हैं?..

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कम आयु में बालों में सफेदी आने का कारण पुराण सर्दी-जुकाम, नजला भी हो सकता है।
  • कफ की बीमारी-जल्दी मरने की तैयारी…यह सिद्ध हो चुका है कि कफ व्याधि से जल्दी आता है-बुढापा!
  • आयुर्वेद के कई ग्रंथों में लिखा है कि- यदि बहुत लम्बे समय तक यदि सर्दी-,खाँसी जुकाम, नजला-निमोनिया बना रहता है, तो जल्दी बुढापा आने के लक्षण हैं
  • कहीं आप केशरोगों से जूझ रहे हैं, तो इसका सर्वोत्तम हल है- अमृतम द्वारा निर्मित 5 हर्बल ओषधियाँ, जो हजारों साल पुराने योगों से संग्रहित हैं।
  • कुन्तल केयर अतिप्राचीन शुद्ध हर्बल फार्मूला है। यह अदभुत केशवर्द्धक ओषधि है।
  • जाने एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि, जो बाल सफेद होना रोकेगी और गाल पर भी चमक लाकर हर हाल में तन-मन को सुंदर बनाएगी।
  • ढ़ीली चाल में फुर्ती लाने में चमत्कारी है। फिर काल अर्थात मौत भी आपसे दूर भागेगी।
  • कुन्तल केयर हर्बल हेयर स्पा (हेम्पयुक्त) …इसमें त्रिफला आदि 27 जड़ीबूटियों का काढ़ा है जो चिपचिपाहट रहित है।
  • बालों में कब लगाएं तेल/ऑयल…प्राचीन हर्बल चिकित्सा शास्त्रों का मत है कि हमेशा बाल धोने से 2 दिन
  • पूर्व सुखी केशों में “कुन्तल केयर हर्बल हेयर ऑयल” हल्के हाथों से सुबह-शाम तेल लगाकर कसकर बांधना चाहिए।
  • फिर, कुन्तल केयर हर्बल शेम्पो से केश धोवन करें। यह बोरिंग या खारे पानी से बाल धोने की वजह से
  • बालों की जड़ों में जमी गन्दगी,रूसी को अन्दर से साफ करता है।
  • रोगप्रतिरोधक क्षमता यानि इम्युनिटी वृद्धिकारक माल्ट-बालों की जड़ों को अन्दर से मजबूती देने तथा घने-काले बालों की चाहत है,
  • तो “कुन्तल केयर हर्बल हेयर माल्ट” राहत व पौष्टिकता प्रदान करता है।
  • इसके नियमित सेवन से पाचनतंत्र मजबूत होता है। लिवर की क्रियाशीलता से कब्ज मिटा देता है।
  • यह अवलेह-माल्ट बालों की जड़ों को मजबूत बनाकर मानसिक विकृतियों एवं सिरदर्द दूर करता है।
  • पेट की अंदरूनी तकलीफों को बाहर कर बालों को खूबसूरती प्रदानकरना इसका विलक्षण गुण है।
  • आयुर्वेद और ध्यान भजन में समानता….
  • आप कितनी ही पूजा-तपस्या कर लें, लेकिन मन की मलिनता मिटे बिना ध्यान नहीं लगता।
  • इसमें बहुत समय लगता है।
  • मछली का बार-बार मरना…..मान लो! तालाब में मछली मर रही हैं, तो रोज मसत्य बदलने से कुछ नहीं होगा।
  • मछली मरने की वजह गन्दा, दूषित जल है। जब तक आप पानी को नहीं बदलेंगे। मछली मरती रहेंगी।
  • आयुर्वेद बस यही करता है। यह शरीर को अच्छी तरह डिटॉक्स कर शुद्धि देता है।
  • रोग पैदा करने वाले आधार का जड़ से नाश करता है। इसमें कुछ समय अधिक लग सकता है।
  • देशी दवाओं की विशेषताएं…..
  • आयुर्वेदिक इलाज से एक बार बीमारी जड़ से साफ हो गई, तो सालों वापस नहीं आती।
  • इसी खाशियत की वजह से आयुर्वेद के फार्मूलों में पिछले लाखों वर्षों से आज तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ,
  • न कभी किसी कोई ओषधि पर प्रतिबंधित नहीं, न बेन लगा।

आयुर्वेद चंद्रोदय, माधव निदान तथा अष्टाङ्ग ह्रदय आयुर्वेद के पुराने ग्रन्थों के अनुसार कम उम्र में बाल सफेद होने का कारण है।

बाल सफेद होने की वजह क्या है?

  • बचपन में कफ विकार जैसे सर्दी-जुकाम, नजला, निमोनिया और फुसफुसों कि निर्बलता अर्थात
  • फेफड़ों की कमजोरी या संक्रमण का लम्बे समय तक बना रहना।
  • मराठी ग्रन्थ वैद्य कलानिधि में लिखा है कि- जब जुकाम पूरी तरह पक जाता है,
  • तो देह अनेक विचित्र व्याधि से घिर जाती है।
  • कफ प्रकृति होने से ही सिरदर्द, माइग्रेन, नजला, निमोनिया, यहां तक कि टीबी,
  • एलर्जी, त्वचारोग प्राणी को परेशान करते हैं। वर्तमान में मोटापा-चर्बी में वृद्धि की वजह भी एलोपैथी है।

कफदोष के कारण बाल होते हैं-सफेद…  कफ दोष के कारण केश पतन तथा कम उम्र में बाल सफेद होने लगते हैं।

कफविकार के चलते सिर की जड़ें कमजोर हो जाती हैं। बाल पतले होकर झड़ने,टूटने लगते हैं।

  • अगर इस तरह की कोई समस्या है, तो सर्वप्रथम कफनाशक आयुर्वेदिक औषधियों का 6 से 8 महीने तक सेवन करना नितांत आवश्यक होता है।
  • आयुर्वेद के सात्विक ग्रन्थ रसतन्त्र सार एवं सिध्ह प्रयोग संग्रह में अनेकों कफ-कास-खांसी नाशक औषधियों का वर्णन है।

आप किसी योग्य आयुर्वेदाचार्य से कफ रोग की चिकित्सा का मार्गदर्शन ले सकते हैं।

अगर ऑनलाइन इलाज चाहते हैं, तो amrutam.globle की वेबसाइट सर्च करके इनमें से आयुर्वेदाचार्यों को चुन सकते हैं।

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हमारा निवेदन इतना ही है कि- स्वस्थ्य रहने के लिए एलोपैथी चिकित्सा तथा अंग्रेजी मेडिसिन से बचने की भरपूर कोशिश करें।

यह तन-मन-धन तीनों का नाश करेगी।

  • आप चाहते हैं कि कफ सन्तुलित रहे, तो अमृतम द्वारा आयुर्वेद की 5000 वर्ष प्राचीन पध्दति से निर्मित लोजेन्ज माल्ट का नियमित 6 महीने तक सेवन करें।
  • लोजेन्ज माल्ट का फार्मूला 7 से अधिक विश्वसनीय शास्त्रों से लिया गया है।
  • “लोजेन्ज माल्ट” पूर्णतः शुद्ध हर्बल ओषधियों से बनाया गया है।
  • इसका कोई हानिकारक दुष्प्रभाव या साइड इफ़ेक्ट नहीं है।

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  • लोजेन्ज माल्ट पूरे परिवार को भी करवाएं। यह असँख्य संक्रमणों का नाश कर,
  • रोगप्रतिरोधक क्षमता यानि इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर है।
  • लोजेन्ज माल्ट का उपयोग वर्तमान में जरूरी है।
  • लोजेन्ज माल्ट के सेवन से वात-पित्त एवं कफ यानि त्रिदोष सम हो जाते हैं।
  • इसजे गर्म पानी से सुबह खाली पेट एक चम्मच रोज लेवें, तो यह कफनाश के साथ-साथ चर्बी को गला देता है।
  • लोजेन्ज माल्ट तीन महीने में धीरे-धीरे 3 से 4 किलो वजन कम करने में सहायक है।
  • प्रातः चाय की जगह लोजेन्ज माल्ट लेने से शरीर से आलस्य, सुस्ती, चिड़चिड़ापन मिटने लगता है।
  • यदि किसी को माल्ट खाने में असुविधा हो, मधुमेह या डाइबिटीज से पीड़ित हों, तो अमृतम द्वारा 17 जड़ीबूटियों से तैयार किया गया है।
  • सेवन करने की विधि…अमृतम द्वारा निर्मित किया गया कफ की क्वाथ दो चम्मच लेकर 300 ml पानी में इतना उबालें कि 100 मिलीलीटर रह जाये,
  • तब इस क्वाथ को छानकर पूरे दिन तीन बार में गुनगुना करके चाय की तरह या चाय की जगह कफ़की क्वाथ 5 महीने तक लगातार लेवें।
  • यह ONLY ऑनलाइन उपलब्ध है!

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आयुर्वेद में आने वालों से आग्रह….

  • अगर आपमें धेर्य है, तभी आयुर्वेद की दवाएं सेवन करें।
  • क्योंकि देशी दवाओं को शरीर का सिस्टम ठीक करने में समय लगता है।
  • यह दवाएं रोग को ठीक करने से पहले दूषित नाड़ी-कोशिकाओं तथा अवयवों को शुद्ध करने में एक से 2 माह का वक्त लेती हैं।
  • आयुर्वेद की ओषधियाँ तन-मन की आधि-व्याधि के दुष्प्रभाव मिटाकर देह को डिटॉक्स करने में सक्षम होती हैं।

19 तरह कफरोगों को दूर कर शरीर की शुद्धि करता है– लोजेन्ज माल्ट- Lozenge Malt- an Ayurvedic Remedy for Lungs & Respiratory Health

https://bit.ly/3BkFIY5

 

  1. दूषित वायु के कारण आयु क्षीण होती जा रही है। 
  2. मौसम की मार है कि-सब बीमार हैं।
  3. शरीर में अब संक्रमण का अतिक्रमण दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।
  4. कुछ काल बाद प्रातः भ्रमण करना भी दुर्भर हो जाएगा।
  5. प्रकृति और पृथ्वी पर बदलते मौसम और प्रदूषण के साथ सर्दी-खाँसी, जुकाम से संक्रमित होना स्वाभाविक है।
  6. इससे छुटकारा पाने के लिए
  7. “अमृतम” लोजेन्ज माल्ट का हमेशा सेवन करें।इसमें डाले गए घटक द्रव्य जैसे-,,
  8. आमलकी मुरब्बा, हरीतकी मुरब्बा तथा जड़ीबूटियों अडूसा, सौंठ, कालीमिर्च, पिप्पली, नागकेशर, सेन्धानमक, मुलेठी, हंसराज,
  9. तेजपत्र, विभितकी, बच, स्फटिक भस्म, सुहागा आदि के अर्क फेफड़ों  छाती के अनेक अज्ञात अहित करने वाले 19 (उन्नीस) प्रकार कफ विकारों को दूर करने में मददगार है।
  10. ^-तुलसी ^-काकड़ासिंगी ^-वनफ़सा ^-पुष्कर ^-वासा ^-कटेरी ^-नवसार सत्व ^-पुदीना सत्व ^-त्रिकटु, मिलाकर इसे और असरकारक बना दिया है।
  • यह सर्दी-खाँसी की विकृतियों का नाश कर फेफड़ों व श्वांस नली की गन्दगी को साफ कर देता है।
  • छाती में जमा बलगम, कफ निकालने में सहायक है।
  • जिद्दी और पुराने टफ-कफ की हर्बल मेडिसिन-
  • लोजेन्ज माल्ट (Lozenge Malt) के चमत्कारी लाभ-
  • 1- सुखी कफदार या कुकर खाँसी
  • 2- बालों का पकना, सफेद होना
  • 3- आलस्य, सुस्ती एवं खराब पाचनतंत्र
  • 4- दमा, व बलगम का दम निकालने में कारगर
  • 5- जुकाम, नजला, निमोनिया
  • 6- गले की खराश
  • 7- गला रुंध जाना
  • 8- कंठ में सूजन
  • 9- छाती में भारीपन
  • 10- नाक से पानी बहना, सर्दी से सिरदर्द
  • 11- कफ के कारण चर्बी-मोटापा की समस्या
  • 12- आंखों में भारीपन
  • 13- टॉन्सिल की तकलीफ
  • 14- बार-बार छींक आना
  • 15- कोरोना के बाद कि परेशानी
  • 16- फेफड़ों का संक्रमण या खराबी
  • 17- श्वांस संस्थान तथा फेफड़ों की दुर्बलता और श्वांस संबंधी समस्याओं का समूल नाश करने में उपयोगी है ।
  • “लोजेन्ज माल्ट” बच्चों,स्त्री-पुरुषों बड़े-बड़ों सभी उम्र वालों के लिए लाभकारी है।
  • इसे लेने के एक महीने बाद अन्य किसी दवा की जरूरत नहीं पड़ेगी
  • लोजेन्ज माल्ट घरेलू तरीके से बनी ओषधि होने से घर का डॉक्टर भी है।
  • दादी मां का खजाना है।
  • उपयोग कैसे करने का तरीका…एक कप गर्म पानी में एक पूरी चम्मच लोजेन्ज माल्ट (Lozenge Malt) मिलाकर सुबह खाली पेट चाय की तरह सुबह पिये।
  • कब्ज को बाहर निकालने के प्रयोग…यदि पउड़ाने सड़े हुए कफ को मल विसर्जन यानि लेट्रिन द्वारा निकालना चाहते हों,तो एक गिलास गर्म दूध के साथ लेवें ।
  • लोजेन्ज माल्ट के नियमित सेवन से पेट साफ रहता है।
  • कफ का बनना भी स्वतः ही बन्द हो जाता है।
  • क्योंकि कब्ज की वजह से ही कफ पैदा होता है।
  • पुराने असाध्य रोगों को कब तक लेना चाहिए- जो लोग हमेशा सर्दी-खाँसी,
  • जुकाम,गले की खराश तथा संक्रमित बीमारियों या एलर्जी से परेशान रहते हों उन्हें कम से कम तीन माह
  • तक दिन में 2 से 3 बार तक लेना गर्म पानी के साथ लेना हितकारी है।
  • सुस्ती-आलस्य से मिटाने के लिए…
  • रात में खाने से एक घण्टे पहले एक चम्मच लोजेन्ज माल्ट Lozenge Malt गर्म दूध के साथ उपयोग करें।
  • गले की खराब व टॉन्सिल्स से मुक्ति हेतु
  • सुबह नाश्ते के साथ 2 से 3 चम्मच ब्रेड या पराँठे में लगाकर खाएं।
  • विशेष आग्रह-“अमृतम” की वेवसाइट पर सभी असाध्य बीमारियों के लिए ११०
  • से अधिक शुद्ध हर्बल दवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

http://amrutam.co.in

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