आज मानसिक स्वास्थ्य दिवस है

World Mental Health Day
दिमागी रूप से परेशान लोगों के लिए 
आज विशेष दिन है…..
 
आज के दिन ही 10 अक्टूबर 1992 को
 “रिचर्ड हंटर” द्वारा 
“विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस”
की स्थापना की गई थी।
मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए
दुनिया को जागरूक करके के उद्देश्य से यह दिन मानसिक स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
World Mental Health Day
 
क्यों बढ़ रहीं हैं आत्महत्या..
【】निराशा के उत्प्रेरक बढ़े हैं।
【】तत्काल सफलता का मोह भी आत्महत्या के लिए एक कारण है।
【】अशांत मन के चलते दुनिया में प्रत्येक 40 सेकंड में आत्महत्या के कारण लोग मर रहै हैं। इसमें पुरुषों की संख्या अधिक है।
【】जीवन उम्मीदहीन होकर कोई विकल्प नजर नहीं आता तब करते हैं- आत्महत्या
यह बहुत पूरानी बात है-
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
कहते हैं जो मन से हार गया, भगवान हरि भी उसका साथ नहीं देता लेकिन यह भी विश्वास है कि-
हारे को हरि नाम है।
हार और मानसिक तनाव से बचने के लिए हरि नाम का सहारा बहुत बड़ी बूटी है।
            !!अमृतम!!
रोगों का काम खत्म करने के साथ
अमृतम ओषधियाँ तन को, तो ठीक करती हैं। वहीं अमृतम पत्रिका के लेख मन की मलिनता मिटाकर मनोबल वृद्धि में सहायक है।
मन क्यों माने हार….
कबहूँ मन गगनहि चढ़ै, 
कबहु गिरै पाताल
कबहु मन अनमुनै लगै, 
कबहु जाबै चाल।
अर्थात
कभी तो मन मस्त-मगन होकर बिहार करता है। और कभी डिप्रेशन की वजह से पाताल लोक में गिर जाता है।
कभी मन ईश्वर के गहन चिंतन में रहता है और कभी
स बिषयों में भटकता रहता है। यह मन अत्यंत चंचल है।
इसलिए चंचल मन को एकाग्र और स्थिर करने के लिए मन्त्र का जप जरूरी है।
कहा गया है-
तन की भूख सहज है तीन पाव या सेर
मन की भूख अनन्त है, निगलै मेरु सुमेरु।
अर्थात
शरीर का भूख अत्यंत साधारण है-यह तीन पाव या एक किलो से मिट सकती है
किन्तु मन की भूख अनन्त होती है जो सुमेरु पर्वत को भी निगल सकता है।
मन दाता मन लालची, 
मन राजा मन रंक !
जो यह मनगुरु सों मिलै, 
तो गुरु मिलै निसंक !!
 
मन्त्र ही समाधान है....
इसलिए ही बताया गया कि-
हर दर्द की दवा है “गोविंद की गली में”
मन्त्रों की शक्ति से मन पर काबू किया जा सकता है
ग्रन्थ पुराण लिखते हैं कि
 “मन्त्र ही मनुष्य” की मदद कर सकता है।
मन में “त्र” लगते ही वह मन्त्र हो जाता
है। हिंदी शब्दावली एवं व्याकरण में
त्र… का अर्थ त्रिशूल यानि तीन प्रकार के शूल या दर्द है। त्रिदोष भी तन को तहस-नहस कर
जीवन चौपट कर देता है। इसलिए
मन्त्र के मनन से मन प्रसन्न रहता है।
स्वस्थ्य शरीर के लिए मन को प्रसन्न ओर दिमाग को शान्त रखने के लिए मन्त्रो का जाप जरूरी है।
लालसाएं आसमान छू रही हैं। इस वजह से मानसिक स्वास्थ्य कमजोर हो चुका है आज का आदमी टूट चुका है। इसलिए मन की मलिनता मिटाने हेतु मन्त्र का उपयोग जरूरी है।
मननात् त्रायते यस्मात्त स्मान्मन्त्र: प्रकीर्तित:….(श.क. ६१७)
अर्थात ‘म’कार से मनन और ‘त्र’कार से रक्षण अर्थात जिन विचारों से हमारे कार्य सिद्ध हो जाएं, जिससे हमारे तन-मन, धन की रक्षा हो,उन्हें मन्त्र कहते हैं।
मन्त्र भी एक प्रकार की वाणी है।
मन्त्र हमें बन्धन में नहीं डालते, बल्कि बन्धन से मुक्त करते हैं।
मन्त्र का सम्बन्ध मानसशास्त्र से है। मन की एकाग्रता पर मन्त्र की नींव है। इंद्रियों के विषयों की ओर से लक्ष्य यानि ध्यान हटाकर मन को एकाग्रचित्त कर मन्त्र साधना, मन्त्र जप से यह सिद्ध होता है। मन की चंचलता जितनी जल्दी हटेगी, उतनी जल्दी मन्त्र सिद्ध होगा।
मन्त्र विद्या उच्चकोटि का विषय है।
श्रद्धा, एकाग्रता और संयम से इहलोक और परलोक में सफलता पाई जा सकती है।
मंत्र की उत्पत्ति विश्वास और सतत मनन से हुई है।
जीवन के स्वर्णिम सूत्र
अरे मन समझ समझ पग धरिये..
मतलब यही है कि मन को भटकने से बचाएं।
मन मारकर इच्छारहित जीवन जीने की कोशिश करें।
जी तोड़ मेहनत करें।
खाने के लिए न जियें अपितु जीने के लिए खायें।
पैसा कमाने के लिए काम न करके केवल काम करने, समय व्यतीत करने पर ध्यान लगाएं।
जो मन दुखाये उससे दूरी बनाएं..
यही सुखी रहने का सर्वश्रेष्ठ सूत्र है।
खुश रहने वाले तथा ओरसन्न रखने वाले लोगों से नजदीकियां बढ़ाएं।
नकारात्मक सोच वालों से दूर रहें।
कमियां निकालने वाले और पीठ-पीछे बुराई करने लोगों से सम्बन्ध न बनाएं।
 
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