चैत्र मास में सूर्य और देवी की आराधना करने से होती है प्रतिष्ठा में वृद्धि।

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हिंदू धर्म में चैत्र मास का विशेष महत्व होता है।

पंचांग के मुताबिक हिंदू कैलेंडर का पहला महीना यानी चैत्र मास शुरू हो गया है

जो कि 27 अप्रैल तक रहेगा।

इस महीने के शुक्ल पक्ष में ही हिंदू नवबर्ष शुरू होता है।

यह इस बार 13 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है।

चैत्र महीने के आखिरी दिन यानी पूर्णिमा को चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में होता है।

इस महीने को भक्ति और संयम का महीना भी कहा जाता है।

पौराणिक मान्यता अनुसार ब्रह्माजी ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना शुरू की थी।

चैत्र नवरात्रि का पर्व प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होकर नवमी तिथि तक चलता है।

इससे सूर्य अपनी उच्च राशि में प्रवेश करेंगे ।

साथ ही भोमाष्टमी और सावर्थ अमृतसिधि योग नवरात्र के महात्म्य में वृद्धि करेगा।

इसी दिन नवसंवत्सर की शुरुवात होगी।

इस दिन सूर्य की मेष राशि में संक्रांति होगी ।

आर्युवेद के मुताबिक क्या करें और क्या नहीं…..

1. इस महीने गर्मी का प्रकोप बढ़ जाता है, इसलिए बासी भोजन खाना बंद कर देना चाहिए।

2. इस महीने भोजन में अनाज का उपयोग कम से कम करना चाहिए और फलों का इस्तेमाल ज्यादा करना चाहिए।

3. सोने से पहले हाथ-मुंह धोने चाहिए और पतले कपड़े पहनने चाहिए।

4. इस माह में हल्के व हल्के रंग के कपड़े पहनने चाहिए। संतुलित श्रृंगार करना चाहिए।

चैत्र मास में ग्रंथो के अनुसार करे ये काम…..

1. इस महीने में सूर्य और देवी की उपासना करना चाहिए। ऐसा करने से पद-प्रतिष्ठा के साथ ही शक्ति और ऊर्जा मिलती है।

2. चैत्र महीने के दौरान नियम से पेड़-पौधो में जल डालना चाहिए और लाल फलों का दान करना चाहिए।

3. महाभारत के मुताबिक इस महीने एक समय खाना-खाना चाहिए।

4. इस महीने सूर्योदय से पहले उठकर ध्यान और योग का विधान है। ऐसा करने से तनाव मुक्त और स्वस्थ रहते हैं।

5. नियमित रूप से भगवान विष्णु और सूर्य की पूजा करनी चाहिए और वृत भी करना चाहिए।

6. इस महीने में ठंडे जल से स्नान करना चाइए। गर्म पानी से नहीं नहाना चाइए,

क्योंकि मौसम में बदलाव के कारण शरीर में गर्म पानी से नहाने के कारण कुछ कमजोरी या संक्रमण की आशंका होती है।

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