Category: Amrutam Daily Lifestyle

  • मालिश से होते हैं 14 फायदे और हड्डियां होती हैं मजबूत।

    प्रतिदिन तन का अभ्यङ्ग करना अत्यंत लाभकारी कर्म है। मालिश से शरीर  मस्त-मलंग और मजबूत होता है। 2000 वर्ष पुराने आयुर्वेद के पुराणों में उल्लेख है कि —  अभ्यंगमाचरेंनित्यं स जराश्रमवाताहा। दृष्टिप्रसाद पुष्टयामु स्वप्न सुत्वक्चदाढ़र्य कृत। शिरः श्रवणपादेषु तं विशेषेण शिलयेत। अर्थात — प्रतिदिन तेल मालिश करने से वायुविकार, बुढ़ापा, थकावट नहीं होती है। दृष्टि…

  • काया की मसाज ऑयल से पाचनतंत्र होता है मजबूत

    आयुर्वेद के संस्कृत ग्रंथों के मुताबिक जिन्हें अपना पाचनतंत्र (मेटाबोलिज्म) हमेशा ठीक रखने की चाहत हो, उन्हें प्रतिदिन काया की मसाज़ ऑयल से मालिश जरूर करना चाहिए अभ्यंग-तेल मालिश से शरीर की पाचन प्रणाली (Digestive system) सुधरती है, क्योंकि अभ्यङ्ग से ब्लड सर्कुलेशन सुचारू होता है। मालिश से लाभ इसके लिए शास्त्रों में लिखा है…

  • च्यवनप्राश अवलेह नाम कैसे पड़ा?

    आयुर्वेद की बहुत प्राचीन 5 किताबों जैसे {{१}} “रसतन्त्र सार व सिद्धप्रयोग संग्रह {{२}} चरक सहिंता {{३}} शारंगधर सहिंता {{४}} भावप्रकाश {{५}} आयुर्वेद सिद्ध संग्रह {{६}} आयुर्वेद सार संग्रह {{७}} अर्क प्रकाश आदि शास्त्रों के मुताबिक च्यवनप्राश का सेवन से तन के सभी विकार, और अनेकों ज्ञात-अज्ञात आधि-व्याधियों का नाश हो जाता है और बुढ़ापे…

  • जाने – प्राचीन आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 9

    जाने – प्राचीन आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 9 पिछले आर्टिकल पार्ट 8 में बताया था- अपतानक (धनुर्वात) Tetanus मांसपेशियों की तकलीफ और  सूजन,क्या है? इस लेख पार्ट 9 में जाने – यक्ष्मा रोग ट्यूबरक्लोसिस यानि टी बी के लक्षण ओर उपचार यक्ष्मा क्या है –– क्षय रोग (टी.बी) एक संक्रामक बीमारी है जो  प्रतिरोधक…

  • जाने – प्राचीन आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 8

    जाने – प्राचीन आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 8 पिछले आर्टिकल्स पार्ट 7 में 5 प्रकार के लकवा, पक्षाघात या पैरालिसिस के विषय में बताया गया था इस लेख पार्ट 8 में जाने – अपतानक (धनुर्वात) Tetanus मांसपेशियों की तकलीफ और सूजन,क्या है? जबड़े और गर्दन की मांसपेशियों (Muscle) में संकुचन का कारण बनता…

  • जाने – प्राचीन आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 7

    पिछले लेख पार्ट 6 में हमने तन-मन में रोगों के तीन स्थान के बारे में लिखा था, जिसमें शेष 2 की जानकारी देना थी अब जाने – प्राचीन आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 7 इस आर्टिकल्स में आयुर्वेद ग्रंथों के मुताबिक 5 प्रकार के लकवा,  पक्षाघात या पैरालिसिस के विषय में जानेंगे शरीर में…

  • Rasayana chikitsa

    Rasayana chikitsa is a branch of ayurvedic treatment that has a strengthening and rejuvenating action on the body. Possessing such qualities, it is something that is a somewhat attraction in this modern age due to the fact that it essentially has an ‘anti-ageing’ effect. Rasayana chikitsa is most beneficial after the body has been on…

  • जाने – प्राचीन आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 6 अति दुर्लभ ज्ञान

    जाने – प्राचीन आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 6 पिछले लेख पार्ट 5 में हमने तीन तरह के रोगों के बारे में लिखा था, अब जाने रोगों के स्थान शरीर में इन तीन स्थानों पर रोग पैदा होते हैं तीन रोग स्थान — तन-मन में रोगों के तीन स्थान बतलाए हैं पहला रोग स्थान —…

  • जाने – आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 5

    जाने – आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 5 पिछले आर्टिकल पार्ट 4 में 4 तरह की अग्नि से पैदा होने वाले रोग के बारे में बताया था। “इस आलेख में जानिए रोग के प्रकार” रोग तीन तरह के होते हैं — 【1】निज रोग — त्रिदोषों यानि वात, पित्त व कफ के बिगड़ने से शरीर…

  • जाने – प्राचीन आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 4

    जाने – प्राचीन आयुर्वेद के बारे में पार्ट – 4 पिछले आर्टिकल में तेरह तरह के वेग रोकने से भयंकर बीमारियां होती हैं। अब आगे द्विदोषज रोग क्या होते हैं — आयुर्वेद शास्त्रों के अनुसार जो रोग वात,पित्त और कफ इन तीन दोषों में से किन्हीं दो दोषों से युक्त कोई बीमारी हो, उसे द्विदोषज रोग कहा…