Category: Amrutam Daily Lifestyle

  • आयुर्वेदानुसार शरीर का विज्ञान क्या है?

    आयुर्वेदानुसार शरीर का विज्ञान क्या है?

    स्वास्थ्य सम्बंधित 18 काम की जानकारी… शरीर के घटकों का कार्य समझ लेना होगा, तथा उसे सुचारू रूप स चलाने के लिये कर्मशील बनना होगा। यह हमारा एक प्रधान कर्तव्य है । क्यों कि इस शास्त्र की शिक्षा से हमें बहुत कुछ लाभ मिल सकता है। मानव-शरीर- शास्त्र के शरीर रचना, इंद्रिय-विज्ञान तथा आरोग्य-शास्त्र ही…

  • 5000 साल पहले भारत में ही हुआ था-विमान का अविष्कार. “जानकर हैरान रह जाएंगे”

    5000 साल पहले भारत में ही हुआ था-विमान का अविष्कार. “जानकर हैरान रह जाएंगे”

    अमृतम पत्रिका, ग्वालियर द्वारा यह लुप्त-सुप्त तथा गुप्त ज्ञान 50 से अधिक पुरानी पुस्तकों से खोजा गया है। इस संजोकर यानी Save करके रखें और भारत की प्राचीन परम्पराओं को प्रणाम करें… अंगिरस ऋषि के वंशज महर्षि भरद्वाज आयुर्वेद के महान ज्ञाता थे। महर्षि भरद्वाज ने किया था विमान/एरोप्लेन का अविष्कार…. पुराने जीर्ण-शीर्ण ग्रन्थों के आधार…

  • शहतूत एक फल है, इसके पत्तो को रेशम के कीड़े बहुत खाते हैं। यह ज्वरनाशक एवं विरेचक होता है…

    शहतूत एक फल है, इसके पत्तो को रेशम के कीड़े बहुत खाते हैं। यह ज्वरनाशक एवं विरेचक होता है…

    अथ तूतः ( सहतूत )। तस्य नामानि तत्पक्कापक्कफलगुणांचाह !! तूतस्तूलश्च पूगश्च क्रमुको ब्रह्मदारु च। तूत्तं पक्कं गुरु स्वादु हिमं पित्तानिलायहम्॥ तदेवाम गुरु सरमम्लोष्णं रक्तपित्तकृत् ॥ १० ॥ शहतूत या तूत के अन्य नाम ….हिंदी०-सहतूत, तूत। शाहतूत । बंगाली०-तूत । मराठी०-तूते। गुजगत०-शेतूर। तेलगु०-पुतिका । तामिल०कम्बली। फारसी०-शाह तूत, तूनतुशं। अरबी०-तूत, तूद हामोज। अं०-Mulberry ( मलबेरी)। ले.Morus indica Griff.…

  • स्थिर बुद्धि क्यों जरूरी है और इसके जबरदस्त फायदे क्या हैँ?

    स्थिर बुद्धि क्यों जरूरी है और इसके जबरदस्त फायदे क्या हैँ?

    अवसाद डिप्रेशन झेल रही नई पीढ़ी के लिए यह लेख बहुत काम है! स्थिरबुद्धि न होने से जीवन सदैव असुख, अभाव, अशांति से बीतता है! वर्तमान में कैंसर होने कि सबसे बड़ी वजह बुद्धि कि अस्थिरता ही है! अस्थिर बुद्धि वाला व्यक्ति परिवार, समाज और राष्ट्र भी दुःखित होकर अशान्ति और अनिश्चिन्तता के झूले में…

  • बाल्मिकी रामायण में लिखी हैं_ घाव भरने था मधुमेह की ओषधियां.

    बाल्मिकी रामायण में लिखी हैं_ घाव भरने था मधुमेह की ओषधियां.

    संजीवनी औषधि चार तरह की बताई हैं……. जाने विशेष दुर्लभ बात!!!! वाल्मीकि रामायण में उल्लिखित संजीवनी के अंतर्गत चार वनौषधियों में से एक है। इस संदर्भ में रामायण का निम्नलिखित श्लोक विशेष उल्लेखनीय है : दक्षिणा शिखरे तल्या जातमोषधपानव । विशल्याकरण नाम विशवकरणीम् तथा संजीवनीमपि। रणींनापियवा शीघ्रामिहास्य । (युद्ध कांड बाल्मीकि रामायण) अर्थात_हे हनुमान! आप…

  • फेटी लिवर या यकृत की किसी समस्या से हों परेशान, तो खाएं.. ये चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि!

    फेटी लिवर या यकृत की किसी समस्या से हों परेशान, तो खाएं.. ये चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि!

    फेटी लिवर के लक्षण, अगर शरीर में हमेशा थकान, कमजोरी रहे तथा स्वभव में चिड़चिड़ापन आने लगे, तो इसे गम्भीरतापूर्वक लें हो सकती है यकृत में कोई विशेष विकराल समस्या। आयुष मंत्रालय की एक शोध व सर्वे के मुताबिक भारत में 25 फीसदी लोग फेटी लिवर की समस्या से जूझ रहे हैं। फेटी लिवर होने…

  • सर्व दुःख, रोग नाशक वेदमंत्रों के चमत्कार

    सर्व दुःख, रोग नाशक वेदमंत्रों के चमत्कार

    उपनिषद, पुराण, ग्रन्थ-शास्त्रों में सफलता के अनेक मंत्रों का उल्लेख है। इस धरती पर ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका उपचार मंत्रों से नहीं किया जा सके। आयुर्वेद कहता है कि बीमारी का असर मन पर होता है। मन की खराबी असंख्य विकारी की जन्मदाता है। इसलिए मन्त्र जपने से मन शांत व प्रसन्न रहता…

  • सूर्य उपासना से होते हैं- चमत्कारी फायदे.

    सूर्य उपासना से होते हैं- चमत्कारी फायदे.

    बहुत कठिन परिश्रम,दिन रात कड़ी मेहनत के बाद भी भाग्योदय नहीं हो पाता। क्योंकि सम्पूर्ण जीव जगत के रक्षक परम पिता स्वरूप भगवान सूर्य की उपासना भूत ही कम लोग करते हैं। दुःख का दुखड़ा मत रोएं…. संसार मत छोडो, दृष्टि छोडो। दृष्टि बदलोगे, तो सृष्टि बदल जाएगी। नजरों को  बदलते ही, नजारे बदलेंगे मगर…

  • बाल्मिकी रामायण में लिखी हैं_ घाव भरने था मधुमेह की ओषधियां….

    बाल्मिकी रामायण में लिखी हैं_ घाव भरने था मधुमेह की ओषधियां….

    संजीवनी औषधि चार तरह की बताई हैं……. जाने विशेष दुर्लभ बात!!!! वाल्मीकि रामायण में उल्लिखित संजीवनी के अंतर्गत चार वनौषधियों में से एक है। इस संदर्भ में रामायण का निम्नलिखित श्लोक विशेष उल्लेखनीय है : दक्षिणा शिखरे तल्या जातमोषधपानव । विशल्याकरण नाम विशवकरणीम् तथा संजीवनीमपि। रणींनापियवा शीघ्रामिहास्य । (युद्ध कांड बाल्मीकि रामायण) अर्थात_हे हनुमान! आप…

  • गिलहरी को भगवान शिव का वरदान क्यों मिला!

    गिलहरी को भगवान शिव का वरदान क्यों मिला!

    एक प्राचीन शिवालय के शिवलिंग पर फूल, प्रसाद, निर्माल्य की सफाई करते हुए उसकी लगन और कड़ी मेहनत को देखकर भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हो गये। कहा जाता है कि उन्होंने उसकी पीठ पर हाथ फेरकर उसे आशीर्वाद दिया। उनकी अंगुलियों के निशान गिलहरी की पीठ पर छप गये। गिलहरी की पीठ पर पड़ी धारियां उसे…