अमॄतम परिवार की तरफ से कोटि-कोटि शुभकामनाएं। होली का यह लेख अवश्य पढ़ें। इस ब्लॉग में डिप्रेशन दूर करने वाले उपाय बताए हैं-

होली की मुबारक…..

ये रंग न जाने कोई जात, न कोई बोली,
मुबारक हो आपको रंग भरी होली।
 
होली की हार्दिक शुभकामनाएं 
उन लोगो को भी है,जो आये दिन 
रंग बदलने में माहिर हैं।
होली का उत्सव- उत्साह, उमंग, ऊर्जा, 
उधम और ऊंटपटांग हरकतों के लिए 
जाना जाता है।
होली के दिन बोली में…..
 ठिठोली न हो,
तो कुछ अटपटा से लगने लगता है।
भविष्यपुराण में होली के बारे में अनेक
कथा-,कहानियों का वर्णन है।
होली वसन्त आगमन के उल्लासपूर्ण
क्षणों के परिचायक हैं।
होली में ढोल-तमाशा, नृत्य एवं संगीत
मस्ती भरे गाने में कभी-कभी थाने
भी जाना पड़ता है।
होली की हलचल.
सर्दी का अन्त और हेमन्त या पतझड़ के अनन्त की सूचक है और वसन्त की काम-प्रेममय लीलाओं की द्योतक है।
होली….बसन्त की आनन्द अभिव्यक्ति ….
भरी जवानी में रंगीन पानी  एवं लाल रंग के संग, अबीर-गुलाल के पारस्परिक आदान-प्रदान से प्रकट होती है।
भारत के कुछ प्रदेशों में यह रंग युक्त वातावरण ‘होलिका के दिन’ ही होता है, किन्तु दक्षिण में यह होलिका के पाँचवें दिन (रंग-पंचमी) मनायी जाती है।
दूसरे दिन चैत्र मास की प्रथम तिथि
यानि प्रतिपदा पर लोगों को
होलिका भस्म को प्रणाम करने
की प्राचीन परम्परा है।
होली के दिन सुबह खेलने से पहले अपने
पितरों-पूर्वजों के प्रतीक शिंवलिंग पर
केशरयुक्त जल, दूध-दही अर्पित
करने का शास्त्रमत विधान है।
!!ॐ नमःशिवाय!! का एक माला मन्त्रोच्चारण करने पूरे वर्ष कोई
रोग-शोक नहीं सताता। अवसाद
या डिप्रेशन से राहत मिलती है।

नकारात्मकता नाशक है होली….

परम शिव भक्त श्री हिरण्यकश्यप
जिन्होंने पृथ्वी पर सबसे पहले स्वर्ण की खोज की थी, इनकी ही एक बहन
होलिका ने जब पूरे संसार में संक्रमण/
वायरस फेल दिया, तो हिरण्यकश्यप ने
अपनी बहन होलिका का दहन कर
दिया था। प्राचीन तैतरीयउपनिषद में
इनका किस्सा भी है।
होलिका भी परम शिव उपासक थी
और राहु ग्रह की खास मौसी भी।
अघोरी की तिजोरी से-
डिप्रेशन का इलाज है 
होलिका दहन की भस्म....
होली खेलने वाले दिन होली की
राख घर में लाकर रख लें। इसमें
कपूर, चन्दन का पावडर मिलाकर
प्रतिदिन शिंवलिंग पर लगाकर अपने मस्तिष्क पर त्रिपुंड या टीका लगावें।
54 दिन के प्रयोग के बाद धीरे-धीरे
मन से अवसाद मिटने लगता है।
का भी साथ में सेवन करते रहें।
यह बहुत ही चमत्कारी प्रयोग एक
बार जरूर करके देखें।
अनिद्रा या नींद नहीं आती हो, तो-
होली की राख या भस्म में इलायची का
पावडर, कपूर और अमॄतम जटामांसी
पावडर मिलाकर रोज रात में सोते
समय माथे पर लेप करके 11 बार
 
!!नमःशिवाय च शिवाय नमः!!
बोलकर सो जावें।
जिन लोगों को मिर्गी के दौरे या
पागलपन की शिकायत अथवा
कोई भी मानसिक विकार हो, तो
वे पीड़ित लोग भी रात वाला उपाय
करें, तो 7 दिन में अदभुत लाभ होता है।
नवविवाहिता क्यों नहीं देखती पहली होली-जाने….बुजुर्गों की परम्परायें….
ऐसी भारतीय मान्यताएं हैं कि-
जिन महिलाओं की शादी के बाद पहली होली हो उन्हें ससुराल की प्रथम होली
नहीं देखना चाहिए।
नववधु को होलिका दहन की जगह से दूर रहना चाहिए। विवाह के पश्चात जिन
लड़कियों की नई-नई शादी हो, उन नववधु को होली के पहले त्योहार पर सास के साथ रहना अपशकुन माना जाता है और इसके पीछे मान्यता यह है कि होलिका (दहन) मृत संवत्सर की प्रतीक है।  दूसरे 
दिन प्रतिपदा से हिंदुओ का नववर्ष 
आरम्भ होता है। 
होलिका दहन हमेशा फाल्गुन मास में किया जाता है, लेकिन चैत्र के महीने में खेली जाती है। अतः नवविवाहिता को मृत को जलते हुए देखना अशुभ मानते है। 

होली के दिन का व्याकरण

स्वर मुँह से बाहर निकलते हैं,
और व्यंजन मुँह के अंदर जाते हैं।
होली के भड़ुओं का गणित-
अदरक की गाँठो सा रहा, मेरा बचपन,
उतने ही हम सुधरे,जितना कूटे गये।

प्रेमियों की होली…..

होली में इस बात का मुझे
हमेशा मलाल रहता है
कि मेरे हाथ तेरे गाल के बीच
कमबख्त गुलाल होता है। 
होली की ठिठोली…..
जरा संभल कर दोस्तों, 
मलना मुझे अबीर
कई लोगों का माल है, 
मेरा एक शरीर।
होली पर फिल्में
■ मदर इंडिया
■ नवरंग
■ कटी पतंग
■ डर
■ शोले
■ बागवान
■ कामचोर
■ कामचोर
होली का उत्सव उमंग और उत्साहवर्द्धक का प्रतीक है।
इनकी हो जाती है खाली झोली-
असत्य, काम, क्रोध, नकारात्मक ऊर्जा
वाले बलवान और राक्षस प्रवृत्ति वाले
लोग बहुत तेजी से, तीव्र गति से बढ़ते हैं
और बहुत जल्दी ही नष्ट या बर्बाद भी
हो जाते हैं।
होली का उत्सव- उमंग और उत्साह
वृद्धिकारक होता है। प्रकृति का प्रदूषण,असत्य और प्राणियों की आसुरी विचारों का विनाश करने के लिए होली उत्सव उत्पन्न हुआ।
होली में अग्नि का विशेष महत्व है
हम अग्नि द्वारा अनेक ज्ञात-अज्ञात
प्रदूषित वातावरण का नाश कर सकते हैं।
राहु की खास मौसी थी होलिका
होलिका परम् शिव भक्त हिरण्यकश्यप
और राहु की मां सिंहिका की सगी बहन थी।
स्वर्ण की खोज सृष्टि में सबसे पहले इनके
परिवार ने ही की थी।

कोरोना वायरस का कहर खत्म—

माँ होलिका मृत यानी पिछले सम्वत्सर
की प्रतीक है। होली जलाने से ब्रह्माण्ड
में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा एवं आसुरी
सोच का नाश हो जाता है, जो स्वास्थ्य
के लिए बहुत ही ज्यादा अनिष्टकारी हैं।
होली जलाने से पृथ्वी में फैले अनेकों
रोगादि, कृमि नष्ट हो जाते हैं।
होली से 15 दिन बाद नव वर्ष का आगमन
होता है। 15 दिन के अन्तराल में धरती से
निगेटिव आसुरी शक्तियों का सर्वनाश
होकर पुनः नवीन ऊर्जा का संचरण हो जाता है। वायु मण्डल शुद्ध एव प्रकृति-पृथ्वी
पावन-पुनीत हो जाती है।
दूरियाँ दिल की मिटें,
 हर कहीं अनुराग हो।
न द्वेष हो, न राग हो, 
ऐसा देश में फाग हो।।
अंग्रेजी में होली का अर्थ
निम्नलिखित भी हो सकता है-
HOLI का अर्थ.
H -hate नफरत
O-out बाहर
L-love  प्यार
i-in  अंदर

मतलब साफ है-

होली का त्योहार नफरत को बाहर
और प्यार को अंदर करने के लिए
मनाया जाता है।

होली के हुड़दंग-

आज से 25-30 साल पहले होली के
भड़वे या भडुआ गली मोहल्लों में बहुत
हुड़दंग मचाया करते थे। सबके विचित्र
स्वांग होते थे। कोई जूतों की माला
पहनते, तो कोई स्त्रियों का भेष में
मस्ती करते थे। उस समय मस्ती
बहुत ही सस्ती थी। अब उपलब्ध नहीं है।
होली में जूते का महत्व-
ग्वालियर के सुप्रसिद्ध कवि, जो “कमल”
के नाम से दुनिया में प्रसिद्ध थे, उनके द्वारा
एक जूता पुराण लिखा गया था।
उसमें उन्होंने होली के समय
जूतों की तारीफ इस प्रकार लिखी है-
जूतों की महिमा
सदा पैरों में रहता हूँ,
स्वयं सरकार होता हूँ।
अगर होली का मौका हो,
तो गले का हार होता हूँ।।
कौन सी ऐसी जगह है,
जिस जगह जुटा नहीं।
मुफ्त में मिलते हैं यदि,
क्रय करने का बूता नहीं।।
अमृतम परिवार की ओर से
होली की शत-शत शुभकामनाएं
दुखियों की होली-
अब क्या खा़क मनाऊँ गा होली।
जब वो ही किसी और की हो ली।।
पुराने समय की बातें-
होली में वो लड़किया भी 
अपने अंदर की होलिका जला ले,
जो दशहरा में
लड़को से अपने अंदर का
रावण जलाने को कह रही थी !!
 दरूओं का त्योहार….
दारु की खुशबू, बियर की मिठास,
गांजे की रोटी, चरस का साग,
भांग के पकोड़े और विल्स का प्यार,
लो आ गया फिर नशेड़ियों का त्यौहार
क्या कहतें हैं स्वार्थी प्रेमी....
आज भी एक सवाल छिपा है
दिल के किसी कोने में।
क्या दिक्कत थी
मेरे साथ हम बिस्तर होने में।।
दंगे से बचे-
संभाल यादों में भी रखा,
उसका चेहरा रंग बिरंगा।
शांत मुस्कान से मचा गई
दिल में मेरे दंगा।।
विश्वास का नाश….
कैसी थीं वो होलियाँ, 
कैसे थे अहसास।
ज़ख़्मी है अब आस्था, 
टूट गए विशवास!! 
 
किश्ती डूबी जिनकी …..
किस से होली खेलिए,
 मलिए किसे गुलाल।
चहरे थे कुछ चाँद से
डूब  गए इस साल।

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