• ब्रह्मांड का लघु रूप:———–

    ब्रह्मांड का लघु रूप:———–

    मानव शरीर एक शिव मंदिर है भगवान शिव अर्धनारीश्वर हैं इसमें आधा भाग नर और आधा भाग नारी के रूप में ही समाहित है वेदों में नर हो या नारी पुरुष ही कहा जाता है.. और रुद्र को परम पुरुष कहा गया है इसका अधिठाता जीवात्मा इस शरीर रूपी पूरी में बसता है.. अतः वह…

  • आयुर्वेद में सोना ————

    आयुर्वेद में सोना ————

    आयुर्वेद के मुख्य ग्रंथ भावप्रकाश निघण्टु मैं बातों की संख्या 7 बताई गई है ! जिसमें सोना चांदी तांबा रांगा जस्ता शीशा और लोहा यह सा धातु पर्वत में उत्पन्न होने खान से निकलने वाले हैं ! यह सप्त धातु मनुष्य के कृशता निशर्लता बुढ़ापा रोग नपुंसकता आदि अनेक रोगों को दूर कर मस्तिष्क देह…

  • अपने विचार सकारात्मक रखें और कोरोना से बचे……

    अपने विचार सकारात्मक रखें और कोरोना से बचे……

    कोरोना सबको होगा ,ये ध्यान रहे। अमेरीका मे एक कैदी को जब फाँसी की सजा सुनाई ,तब वहाँ के कुछ वैज्ञानिकों ने विचार किया… कि इस कैदी पर एक प्रयोग किया जाये, तब उस कैदी को बताया गया कि उसे फाँसी की बजाय विषधर कोब्रा से डसवा कर मारा जाएगा। फाँसी वाले दिन उसके सामने…

  • चैत्र मास में सूर्य और देवी की आराधना करने से होती है प्रतिष्ठा में वृद्धि।

    चैत्र मास में सूर्य और देवी की आराधना करने से होती है प्रतिष्ठा में वृद्धि।

    हिंदू धर्म में चैत्र मास का विशेष महत्व होता है। पंचांग के मुताबिक हिंदू कैलेंडर का पहला महीना यानी चैत्र मास शुरू हो गया है जो कि 27 अप्रैल तक रहेगा। इस महीने के शुक्ल पक्ष में ही हिंदू नवबर्ष शुरू होता है। यह इस बार 13 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। चैत्र…

  • पेट में हो रोग तो काहे का भोग ——

    पेट में हो रोग तो काहे का भोग ——

    एक कहावत है… कि जब पेट में हो रोग तो काहे का भोग वह का आशय भोजन के भोग से है! हमारा पेट साफ रहे इसलिए व्रत उपवास का विधान हमारे शास्त्रों ने बताया है 7 दिन में 1 दिन का उपवास हमारे पेट के अनेक रोगों का नाश कर जटा रागनी जागृत करता है!…

  • जीवन का सबसे बड़ा सुख है स्वास्थय…

    जीवन का सबसे बड़ा सुख है स्वास्थय…

    आइए करते है अपनी सेहत से जान – पहचान….. आज वर्ल्ड हेल्थ-डे के अवसर पर विशेष सुविचार…सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं….। जिसके पास स्वस्थ शरीर है, उस पर मानसिक तनाव भी अपना प्रभाव छोड़ पाने में असमर्थ होता है. एक कहावत है पहला सुख निरोगी काया. यानी जीवन का प्रथम और सबसे बड़ा सुख अगर…

  • परिवर्तन संसार का नियम है ——

    परिवर्तन संसार का नियम है ——

    प्रत्येक व्यक्ति किसी शो से एक दूसरे से भिन्न होता है .. सभी के दिमाग में भी विचारों की चेन चलती रहती हैl एक विचार के पीछे इससे जुड़े उसी तरह के कई विचार दिमाग में स्वता ही आते हैं.. विचार चाहे सकारात्मक या नकारात्मक जिसकी सोच ऐसी होती है… उसके वैसे ही विचार भाव…

  • भगवान शिव का तीसरा नेत्र  एवं वातावरण ———-

    भगवान शिव का तीसरा नेत्र एवं वातावरण ———-

    भगवान शिव का तृतीय नेत्र हमारा आज्ञा चक्र है… कुंडलिनी का यह छटा चक्र है.. यही सृष्टि की बाहरी और आंतरिक शक्तियां समाहित हैं.. पिंकी नोक के बराबर यह आज्ञा चक्र मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास से संबंधित है.. स्थल तथा सूक्ष्म जगत की विभिन्न हलचलो के साथ इसी केंद्र के माध्यम से संपर्क साधा जा…

  • रामायण——–

    रामायण——–

    तुलसीकृत रामायण और रामचरितमानस के ग्रंथ को अभी 500 वर्ष पूरे हुए हैं.. इन 500 वर्षों में ही भारत का भाग्य भाग गया अर्थात रूठ गया 500 वर्ष पूर्व भारत सोने की चिड़िया कहलाता था जैसे रामायण आदि ग्रंथों के प्रभाव और विचारों से प्रेरित कुछ मूर्ख लोगों ने “रं” बीज मंत्र का उच्चारण राम…

  • हमारे मस्तिष्क में सुक्ष्म ज्ञान है?…….

    हमारे मस्तिष्क में सुक्ष्म ज्ञान है?…….

    हमारे शरीर में शक्ति का अत्यंत भंडार है… बस हमें उसे जानने की देरी हैं। कोई भी वयक्ति जीवन भर व्यर्थ नहीं रहना चाहेगा ।… और मस्तिष्क में ही सुक्ष्म ज्ञान है… इस ज्ञान के महाविज्ञान को ध्यान और धैर्य से इस धरा की खोज की धरा को जीता जा सकता है… इस धरा से…

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