• चेहरे को चमकाने वाला एक कीमती- आयुर्वेदिक कुमकुमदी तेल….

    चेहरे को चमकाने वाला एक कीमती- आयुर्वेदिक कुमकुमदी तेल….

    Past Forward अर्थात प्राचीन यानि पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाओ। ओल्ड सदैव गोल्ड रहता है। अमृतम कुंकुमादि तेलम भी आयुर्वेद की 5000 साल प्राचीन पध्दति के अनुसार निर्मित है! इसमें नेचुरल सनस्क्रीन गुण होते हैं। आयुर्वेद का यह बहुमूल्य फेस ऑयल रोम-रोम की मरम्मत कर, चेहरे की त्वचा को चमका देता है। हैदराबाद, चेन्नई, बैंगलोर, मुम्बई के…

  • एकादशी को रोगों से बचने के लिए चावल भूलकर भी न खाएं…क्यों?

    एकादशी को रोगों से बचने के लिए चावल भूलकर भी न खाएं…क्यों?

    भारतीय परम्परा लगातार चलने वाला और तन-मन-अन्तर्मन को स्वस्थ्य रखने वाला मार्ग है। यह महान महर्षियों (प्रकृति वैज्ञानिक) की खोज है। हमारे ग्रन्थ थोपी हुई रूढ़ि नहीं है। अगर तन्दरुस्त रहना है, तो प्राचीनता को ही सबसे बड़ी ओषधि मानकर चलें। आयुर्वेदिक शास्त्रों एवं हरिवंश पुराण के अनुसार चावल यानि अक्षत और जौ को जीव मानते हैं।…

  • तंदरुस्ती के 25 सूत्र…….

    तंदरुस्ती के 25 सूत्र…….

    वायु विकार में मुलेठी एवं गुलकन्द युक्त पान खाने के बाद लेवें, तो गैस से तुरन्त राहत मिलती है। आयुर्वेदिक शास्त्रों में विशेष निर्देश दिया गया है कि….. सौ काम छोड़कर खाना, हजार काम त्यागकर नहाना और लाखों कार्य छोड़कर पाखाना। क्योंकि पेट सफा, तो सब रोग दफा यानी पाखाना साफ होने से सब बीमारी…

  • कैसे रखे शरीर का ध्यान। जाने… देखभाल के तरीके……

    कैसे रखे शरीर का ध्यान। जाने… देखभाल के तरीके……

    सोशल मीडिया पर लिखे लेखो पर तुरन्त भरोसा न करें अन्यथा शरीर को हो सकता है ! भारी नुकसान!!! अमृतम पत्रिका अब विकिपीडिया पर पढ़ें… सोशल मीडिया पर बहुत सी जानकारी मनगढ़ंत लिखी जा रही हैं। इससे शरीर रोगमुक्त होने की जगह रोगों से घिरता जा रहा है। जब तक सन्दर्भ ग्रन्थ का उल्लेख न…

  • लहसुन रोज कितना खाना हितकारी है।

    लहसुन रोज कितना खाना हितकारी है।

    लहसुन के अन्य नाम… लसुन, लशुन, रसुन, लसुण, बेल्लूल्ली, तेल्ल लिगड्डा, सिंधी में पोम, फारसी में सीर कहते हैं। लहसुन का सेवन मद्य, मांस, अम्ल रस युक्त पदार्थ भक्षण करने वालों के लिए अत्यंत रहता है। अत्याधिक व्यायाम करने वाले, धूप में ज्यादा चलने वाले, क्रोधी स्वभाव वालों को लहसुन का उपयोग भूलकर भी नहीं…

  • चेहरे पर ग्लो लाने के लिए क्या खाना चाहिए……..

    चेहरे पर ग्लो लाने के लिए क्या खाना चाहिए……..

    हमारी खूबसूरती का आधार है लिवर/यकृत.. यकृत की तंदरुस्ती के बिना, कितना ही फेशियल, मसाज करा लें अथवा खूब बाहरी संसाधन आजमा लेवें। कुछ भी लाभ होने वाला नहीं है। शरीर की सारी सुंदरता का आधार हमारा यकृत है। यदि लिवर क्रियाशील या एक्टिव है, तो बुढापे तक सुंदरता बनी रहती है। देह में लिवर…

  • एलोवेरा से मेकअप करें और खाएं भी, तो दूर होती हैं अनेक बीमारियां…

    एलोवेरा से मेकअप करें और खाएं भी, तो दूर होती हैं अनेक बीमारियां…

    एलोवेरा जेल एक चम्मच सुबह ख़ाली पेट खा भी सकते हैं और चेहरे पर भी लगाए, तो अति उत्तम रहता है। मोटापा-चर्बी भी घटाता है- एलोवेरा! एलोवेरा का पौधा घर पर लगा लेवें। यदि झंझट से बचना चाहते हैं, तो अमृतम एलोवेरा जेल मंगवा सकते हैं। ¶~ जाने 33 फायदे और विशेषतायें…      …

  • एक धर्म अगर तंदरुस्ती का होता, तो सारा संसार से सुखी-स्वस्थ्य रह सकता है…

    एक धर्म अगर तंदरुस्ती का होता, तो सारा संसार से सुखी-स्वस्थ्य रह सकता है…

    आज का धर्म सब कुछ पा लेने की लालसा है। समस्त झगड़े की जड़ धर्म है। प्राचीनकाल से मानव को मत, सिद्धान्त, विश्वास बेकहा गया है। ये सब झूठे हैं। आज दुनिया में ऐसा कोई धर्म नहीं है, जो व्यक्ति का खुद से साक्षात्कार करा सके। शान्ति दे सके। लगभग समस्त धर्म डराने के लिए…

  • ध्यान सामान से अधिक महत्वपूर्ण है। प्रभाव जमाने और अभाव मिटाने के से मान-अपमान के लिए ध्यान-योग जरूरी है…. अमृतम पत्रिका

    ध्यान सामान से अधिक महत्वपूर्ण है। प्रभाव जमाने और अभाव मिटाने के से मान-अपमान के लिए ध्यान-योग जरूरी है…. अमृतम पत्रिका

    ध्यान कोई पूजा नहीं है। यह अनुष्ठान या विधि-विधान भी नहीं है। ध्यान है-प्रकृति को देना…! लेना कुछ भी नहीं। ईश्वरोउपनिषद में लिखा है कि हम ईश्वर को केवल श्वांस ही दे सकते हैं। शेष प्रसाद, फल आदि अर्पित करना पाखंड है। ध्यान है-तन-मन-अन्तरात्मा का कचरा साफ कर विचारों की शून्यता। फिर स्वयम के अतिरिक्त…

  • बवासीर या पाइल्स क्यों होता है?

    बवासीर या पाइल्स क्यों होता है?

    क्यों होता है – अर्श, बबासीर या पाइल्स… १- पुराना कब्ज, २- मल का कड़ा होना, ३- आँतों की खुश्की, ४- आँतों का क्षतिग्रस्त होना ५- पेट की खराबी, ६- पित्त का प्रकोप आदि कारण है -बवासीर होने का। रोग देह में दो ही जगह आते हैं… पाइल्स की माल्ट के उपयोग से बवासीर जड़…

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