आज पुलिस स्मृति दिवस है

क्या आपको मालुम है कि—
हर साल 21 अक्टूबर पुलिस 
बलिदानियों को समर्पित है।

पुलिस के बलिदान को कोई याद नहीं

करता, जबकि पुलिस भी देश में
बलिदान देने में पीछे नहीं है...


२१ अक्टूबर 1959 लद्दाख में जानहींन
स्थान के पास सी.आर.पी.एफ पुलिस के
एक गश्तीदल पर चीनी सेना के हमले में
10 पुलिस कर्मियों को जान गवानी पड़ी थी।
21.10.1960  के दिन शहीद पुलिसकर्मियों
को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए
 “पुलिस स्मृति दिवस” घोषित हुआ था।
इस दिन सभी पुलिस स्मृति में निर्मित
स्मारकों पर पुष्प अर्पित कर शहीदों के
नाम का वाचन किया जाता है।
अभी तक 34844 पुलिसकर्मी कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए हैं। 
 
इन बलिदानी पुलिसकर्मियों की स्मृति को
संजोए रखने के उद्देश्य से सन 2018 में
देश की राजधानी दिल्ली में
 “राष्ट्रीय पुलिस स्मारक
निर्मित किया गया है।
पुलिस स्मृति दिवस इनकी वीरता,
बलिदान और कर्तव्य पालन के साथ
कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए
“अमृतम पत्रिका” परिवार
इन्हें बारम्बार प्रणाम-नमन करता है।
पुलिस के कारण समाज और देश पूरी
तरह सुरक्षित है। फिर भी कभी-कभी
कुछ स्वार्थी तत्व या बेईमान-चोर प्रवृत्ति
के लोग तथा वे असमाजिक तत्व, जो
हर गलत कामों में पुलिस को अपना दुश्मन
या रोड़ा मानते हैं।
समाज की सुरक्षा में बहुत बड़ा
योगदान है-पुलिसकर्मियों का….
समाज में आज जो भी सामंजस्य है उसमें
पुलिस की बहुत बड़ी भूमिका है।
अपने घर-परिवार और त्योहार त्यागकर 24 घंटे देश एवं शहर की सेवा में 
तत्पर रहते हैं- पुलिसकर्मी
एक पुलिसकर्मी को शारीरिक परिश्रम
के अलावा अनेक खतरों के सामना करना
पड़ता है। इनके हर उत्सव के अवकाश की
इच्छा अतृप्त रह जाती है।
परिवार से दूरी, ड्यूटी की मजबूरी
समय पर न्याय जरूरी इनकी जिंदगी
का फलसफा होता है।
अनियमित नींद, अवैद्य खानपान और
लगातार कर्तव्य-कर्म तथा लंबी ड्यूटी
के चलते पुलिसकर्मियों को अनेक बीमारियों
से जूझकर शरीर को खोखला कर लेते हैं।
अन्य विभागों की तुलना में पुलिस वाले समाज के तिरस्कार का ज्यादा शिकार होते
 हैं।
रोगों का रायता…
 पुलिसकर्मी अक्सर बहुत से रोग जैसे-
बीपी हाई, निम्न रक्तचाप, मोटापा,
मधुमेह, ह्रदय रोग, मौत का भय, तनाव
और कलंक भय से जूझते रहते हैं।
सादर श्रद्धांजलि और नमन—
आज सभी भारतवासियों को
बलिदानी पुलिस के परिवार को
पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर
उनकी आत्मा की शांति हेतु मूक
प्रार्थना करना चाहिए।
सादर नमन के साथ-साथ उन सभी
शहीदों के प्रति आभार जताना भी
जरूरी है।
पुलिस कर्मियों के निःस्वार्थ भाव से की गई
नागरिकों की सेवा-सुरक्षा के लिए जो
कर्तव्य निर्वहन कर रहे हैं,
ऐसे पुलिसकर्मियों की देशभक्ति पर जनमानस को कोटि-कोटि
शुभकामनाएं देना हमारा भी फर्ज है।
जनसेवा के कठिन पथ पर निरन्तर
देखभाल कर रहे पुलिस परिवारों को
शत-शत नमन।
यह लेख
श्री योगेश चौधरी
पुलिस महानिरीक्षक (योजना)
पुलिस मुख्यालय भोपाल से साभार है।
 

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