एक प्राकृतिक शिव कुंड में शिवलिंग ——-

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मध्य प्रदेश के सीधी जिले में चुरहट तहसील के अंतर्गत डढ़ीया गांव से 6 किलोमीटर दूर कैमोर पर्वत के ऊपर कोने में स्थित कांसा गांव में प्राकृतिक शिव कुंड देख कर कोई भी शिव भक्त भावविभोर हो सकता है

शिवलिंग पर नाग राज का प्रत्यक्ष रूप से लिपटा होना और अज्ञात स्थान से 12 महीने जलधारा का प्रभाह यह प्रकृति की देन है यहां एक प्राकृतिक शिव कुंड है

इसे महादेवन का कुंड कहा जाता है इसी कुंड के अंदर 40 फुट नीचे शिव जी अपने गणो के साथ विराजमान है

इतने घने जंगल में शिवलिंग के दर्शन पाकर साक्षात शिव से साक्षात्कार की अनुभूति होती है

शिवलिंग पर एक भयंकर काला विषैला नाग शाम 6:00 बजे से सुबह सूर्योदय तक साक्षात रुप में लिपटा रहता है

नाग का एक प्रकार से विद्युत सप्लाई करने वाला एक उपकरण है शिवलिंग पर ले इस काले नाग के दर्शन कुछ विशेष लोग ही कर पाते हैं

भदोही उत्तर प्रदेश के निकट शेरपुर गांव का निवासी छूटई उर्फ छोटेलाल बिंद से फरवरी 2003 में अचानक मुलाकात हुई जब अपनी कार के आगे खतरनाक कोबरा नाग को देख कर चौक गए

और अपनी गाड़ी साइड में लगा दी तभी इस जहरीले आदमी से मुलाकात हुई यह छूटई नाम का व्यक्ति ने बताया कि अभी तक कि यहां 200 से 250 कोबरा नाग का विष पी चुका है

कई नाग दक्ष पीड़ितों का जहर जूस कर कर चुका है
आज दिनांक 7-7-2005 को जानकारी मिली कि एक खतरनाक नाग को पकड़ने का प्रयास करते समय आई एक नागिन छोटेलाल को डसकर खत्म कर दिया

ज्ञान में निहित है कष्टों का निदान ज्ञानदान भोजन तथा वस्त्र के दान से कहीं उत्तम है प्राण दान से भी उच्च है

क्योंकि ज्ञान ही मनुष्य का प्राकृत जीवन है

आध्यात्मिक ज्ञान तो सदैव के लिए दुखो कष्टों को दूर कर सकता है

अन्य किसी दान से अल्प समय का ही कष्ट दूर होता है

ज्ञान वास्तविक शक्ति है ज्ञान से व्यक्ति स्वयं को परिवर्तित कर जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है

आध्यात्मिक ज्ञान से नीचे है बौद्धिक सहायता इससे नीचे शक्ति बल की सहायता इससे नीचे धन की सहायता आध्यात्मिक शक्ति संपन्न व्यक्ति यदि चाहे तो हर क्षेत्र में सक्षम हो सकता है
कितना दुर्भाग्य है

कि दुनिया 100 विश्वविद्यालय की सूची में भारत का एक भी विश्वविद्यालय नहीं है

भारत में हर क्षेत्र में विशेषज्ञों की भरमार है

इसलिए सही तथ्य का पता लगाना मुश्किल हो जाता है

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