भारतीय संस्कार परंपरा में सूर्य ——

भारतीय संस्कार परंपरा में सूर्य को पिता पुत्री को माता चंद्रमा को मामा एवं नक्षत्र मंडल तारा समूह को कुटुंब की संज्ञा दी गई है

भारत का अर्थ है भा अर्थात प्रकाश जो सदैव प्रकाश में ऊर्जा में रक्त हो अर्थात पूर्णता में क्रियाशील सूर्य हमारे साक्षत देता है

इन्हें भगवान शिव की एक आंख ही कहा जाता है प्रातः काल सूर्योदय के समय सूर्य को जल देने की प्राचीन परंपरा है

फारसी समुदाय जो की संख्या अत्यधिक कम है

इनके यहां केवल सूर्य की स्थिति की जाती है सभी पारसी लोग प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में घर की साफ सफाई कर भगवान सूर्य की अगवानी करते हैं

इसलिए पारसी लोगों की जनसंख्या कम होने के बावजूद भी संपूर्ण विश्व में उनकी ख्याति होती है सूर्य को उर्दू में आफताब कहते हैं

यह जन्मपत्रिका में जिस स्थान पर विराजित है

उस स्थान से सप्तम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखते हैं जब सूर्य की महादशा आवे तब निम्नलिखित उपाय करने से विशेष लाभ होते हैं

संस्कृत का पाठ हरिवंश पुराण भगवान शिव को सुनाएं संभव हो तो परिवार के सदस्य भी सुने प्रतिदिन सवा..

सौ ग्राम या सवा किलो गेहूं 30 दिन तक शिव मंदिर में छोड़ कर आ गए सफेद मदार पुष्प शिवलिंग पर चढ़ाने

कमल पुष्प आया लाल गुलाब गुड़हल के पुष्प की माला शिवलिंग पर 30 दिन नियमित रूप से चढ़ावे गुरुवार का व्रत करें..

प्रत्येक गुरुवार स्वर्ण पात्र में शिवलिंग पर जल चढ़ाने गाय को चने की दाल केला खिलावे गेहूं का बना नैवेद्य केले के पत्ते पर रखकर ..

किसी शिव मंदिर में छोड़ आवे गुरु मंत्र का 24 घंटे मन ही मन जाप करें अंधों को भोजन कराएं गरीब अपाहिज बच्चे की आंखों..

का इलाज कराएं सूर्य की महादशा में व्यक्ति को सरकार शासन में भयंकर हानि होने लगती है आंखों के रोग या तकलीफ होती है

स्वयं के निजी वाहन से दुर्घटना की संभावना अथवा दुर्घटना के बाहर का नष्ट होना आदि की संभावनाएं बनती है

यदि किसी व्यक्ति का जन्म कृतिका नक्षत्र में हुआ है तो उन्हें हमेशा निम्न उपाय जीवन भर करते रहना चाहिए ताकि सूर्य की कृपा सदैव बनी रहे ..

वेद मंत्र अग्निर्मघेती मंत्र का हर रविवार मध्य के समय किसी शिव मंदिर में जॉब करावे गेहूं के काला यह रस शिवलिंग पर चढ़ा..

दें पूर्व में ईशान कोण में बैठकर प्रतिदिन गुरु मंत्र या ओम नमः शिवाय मंत्र की एक माला मन ही मन जपे जहां पशु भूमि अथवा संगीत विद्यालय हो..

उसके नजदीक से मंदिर में मीठा दूध चढ़ाने किसी वृद्ध ब्राह्मण से पूजा करावे

सूर्य सिंह राशि स्वामी होता है मूलत्रिकोण राशि भी सिंह की होती है

क्षत्रिय वर्ण पुरुष लिंग होता है चतुर चित्रकार मध्य समय में अधिक पावरफुल होता है पूर्व दिशा मैं बास स्वर्ण धातु होती है

गुरु ग्रह की पूजा करने से तुरंत वश में आते हैं उग्र रूप होता है स्त्री स्वभाव लिखत रस पशु भूमि में वास प्रौढ़ अवस्था होती है

रक्त रंग स्थान वन पिता से संबंध आत्मा का धारक तथा अग्नि देता है शरीर में स्त्रियों पर अधिकार होता है

शिव मंदिरों में भक्तों और पुजारियों की अवस्था देखकर दलित दुखी होकर लिखा

सोचा था शिव के लिए जान दे दूंगा जीर्ण शीर्ण विक्रय शिवलिंग को सम्मान दे दूंगा मेरा मुझसे आज भरोसा टूट गया मैं लोगों की ..

आदतें देखकर शिव से रूठ गया मेरी पर्वत जैसी बाहों में जोश अलग ही था स्वार्थ भरी दुनिया में आकर यहां फौलादी दिल टूट गया

अंक आठ और चार ज्योतिष की किन्ही किन्ही प्राचीन ग्रंथों में आयु 8 प्रकार की बताई गई है

सामान्य तौर पर चार प्रकार के प्रमाण चर्चा में हैं

चार प्रकार की आयु अवस्था बाल्यकाल युवावस्था प्रौढ़ावस्था वृद्धावस्था लेकिन गूढ़ रहस्य के अनुसार आयु की अवस्थाएं होती हैं

जन्म से लेकर 1 वर्ष तक के नवजात शिशु को शैशव सुकुमार कहते हैं

5 वर्ष प्रयत्न शिशु को निर्मल बालक कालांश कहते हैं 5 वर्षीय 12 वर्ष की बाल्यावस्था की योग्य वृद्धि काल होती है

12 से 18 वर्ष तक की योवनाआरंभ शुभकालांश कहते हैं

1830 की युवावस्था कर्मकाल 30 से 45 मध्यस्था सुखद कालांश 45 से 60 प्रौढ़ावस्था सम कालांश वर्ष आयु 7 वर्ष ..

उपरांत वृद्धावस्था वानप्रस्थ कालांश एवं श्री हरि संकीर्तन शुद्ध दिनचर्या रात्रि चर्या ब्रह्मचर्य होती है

भगवान कृष्ण का जन्म सम्वत 2064 सन 2007 के अनुसार 5233 वर्ष पूर्व हुआ था और महाभारत का युद्ध 5108 वर्ष पूर्व हुआ था

इस अनुसार महाभारत के युद्ध के समय भगवान श्री कृष्ण की आयु 5233 घटित 5108 = 128 वर्ष के करीब थे

उस समय विवाह युवावस्था जैसे ही प्रतीत होते थे

कि उनका योग साधना पर पूर्ण विश्वास था मानव शरीर में 206 हड्डियां होती हैं

अर्थात 2 + 6 = 8 एवं 6 – 2 = 4…अंक होता है ते हैं कि पहले एक आदमी नौकरी करता था परिवार के 9 लोग खाते थे

फिर नौकरी के नाम पर चाकरी हुआ अर्थात एक व्यक्ति कमाता था 4 खाते थे फिर तनख्वाह होगा केवल एक व्यक्ति अपने तन को ही खिला सकता था

फिर वेतन हुआ अर्थात वेतन पाने के बाद व्यक्ति तन की भी देखभाल नहीं कर सकता अब तक नौकरी में कितना है वेतन पाएगा किंतु वे तन ही रहेगा!

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