Category: Amrutam Daily Lifestyle

  • साइकिल चलाओ और तन्दरुस्त बनो!

    साइकिल चलाओ और तन्दरुस्त बनो!

    कल, कलदार और क्लेश से दुनिया परेशान है। भविष्य में क्या होगा?… इसी चिंता में विश्व की एक चौथाई जनसँख्या बीमार है। सायकल चलाने वाले अंकल को……. कल की कोई फिक्र नहीं रहती। क्योंकि सायकल चलाकर वह तन्दरुस्त रह सकता है। बचपन में साइकिल चलाने के मजे, जवानी में ना जाने कहाँ खो जाते हैं।…

  • ज्योतिष के रहस्यमय प्रयोग। ग्रहों की पीड़ा-निवृत्ति का एक सरलतम उपाय है. संबंधित ग्रहों के बीज मंत्र का जाप!

    ज्योतिष के रहस्यमय प्रयोग। ग्रहों की पीड़ा-निवृत्ति का एक सरलतम उपाय है. संबंधित ग्रहों के बीज मंत्र का जाप!

    क्या होते हैं ?…नव ग्रह मंत्र भारत के आस विशाल ग्रंथ स्कंधपुराण में दुनिया के हरेक दर्द का इलाज बताया है। इन साधारण ज्योतिष चिकित्सा के सहारे आप बुरा से बुरा वक्त को सौभाग्य में बदल सकते हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि अधिकांश सभी मंत्र किलित और शापित होने के कारण उनके जेपी से जल्दी…

  • मेवा युक्त दूध के चमत्कारी फायदे..

    मेवा युक्त दूध के चमत्कारी फायदे..

    1 जून विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर इन्हीं फ़ायदों से हम आपको अवगत करवाने जा रहे हैं। आरोग्यता तथा वीर्य वृद्धि के लिए ऐसे करें दुग्ध का सेवन…. दूध में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, प्रोटीन, नियासिन आदि तत्व पाए जाते हैं। दही और छाछ दूध के ही उतोत्पाद हैं। लिहाजा विभिन्न अनाजों के साथ…

  • हे भगवान सूर्य!… इस धरा पर आपका स्वागत है।

    हे भगवान सूर्य!… इस धरा पर आपका स्वागत है।

    शिवलिंग स्वरूप सूर्य हमारी तरह ही भीषण संघर्ष करते हुए, किरणों का नन्हा सा प्रकाश देकर जगत की सर्वात्माओं को ज्योतिर्मय करता है। सम्पूर्ण सृष्टि आदित्य देवता की ऋणी है। सूर्य को ही हर जीव का आत्मा बताया है। सदियों से सदाशिव भोलेनाथ से समस्त साधु संत, शिवयोगी सदियों से प्रार्थनारत हैं कि -भगवान शिव…

  • क्या होगा भारत का भविष्य और कैसी होगी दुनिया की हाल या चाल…

    क्या होगा भारत का भविष्य और कैसी होगी दुनिया की हाल या चाल…

    कट्टरपंथियों का अंत सन्निकटहै?… लाखों वर्षों से दुनिया भाग्य के भरोसे चलायमान है और भारत के राष्ट्रगीत में आया है कि  “भारत भाग्य विधाता” भारत के भाग्य का विधाता तो एक मात्र महादेव ही है अन्य कोई नहीं। अवधूत कहते हैं कि – शिव ही विधाता शिव ही विधान शिव ही ज्ञानी, शिव ही ज्ञान।। शेष…

  • जाने एक चमत्कारी छिन्नमस्ता मंत्र और यंत्र का दुर्लभ चित्र और जाने तांत्रिक बन की विधि…

    जाने एक चमत्कारी छिन्नमस्ता मंत्र और यंत्र का दुर्लभ चित्र और जाने तांत्रिक बन की विधि…

    छिन्नमस्ता यंत्र का फोटो नीचे देखें।   चित्र में छिन्नमस्ता देवी का यंत्र चित्रित है। ये नेपाल के पुरश्चर्याणव ग्रंथ में चित्रित है। इसे एक प्राचीन ग्रंथ से लिया गया है। घर में इस यंत्र का चित्र लगाने से तंत्र, टोटका, जादू टोने का दुष्प्रभाव खत्म हो जाता है।  ये तंत्रोक्त प्राणसंक्रांति का द्योतक कराते…

  • क्या भोजन सही दिशा में करने से सुख समृद्धि बढ़ती हैं?

    क्या भोजन सही दिशा में करने से सुख समृद्धि बढ़ती हैं?

    दिशा से दशा बदलिए…. दिशाओं का हमारे जीवन में सर्वाधिक महत्त्व है। सही दिशा में चलनेवाले जहाज, वाहन अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं, गलत दिशा में चलनेवाले समय का अपव्यय करने के साथ ही साथ अपनी मंजिल को भी खो बैठते हैं और अनावश्यक कष्टकठिनाइयों को झेलते हैं। यह अलग बात है कि चतुरगण परिस्थितियों…

  • आयुर्वेद की भाषा में रोगों के संस्कृत नाम…

    आयुर्वेद की भाषा में रोगों के संस्कृत नाम…

    संस्कृत में बीमारियों के नाम अत्यंत विचित्र हैं। जिसे समझने में बहुत दिक्कत होती है। ज्यादातर लोगों ने देखा होगा कि दवाओं के लेबल पीआर फल विरेचन, मंदाग्नि, अशमरी आदि लिखा रहता था। आज भी अनेक आयुर्वेदिक कंपनियों के उत्पादों पर संस्कृत नामों का उल्लेख रहता है। इन्हीं नामों का हिंदी अर्थ, उपयोग तथा अंग्रेजी…

  • मिर्गी, चक्कर आने की १०० फीसदी आयुर्वेदिक चिकित्सा…

    मिर्गी, चक्कर आने की १०० फीसदी आयुर्वेदिक चिकित्सा…

    अगर कोई व्यक्ति मिर्गी आदि मानसिक विकारों से पीड़ित परेशान हो, तो आयुर्वेद की पुरानी किताब का यह प्रयोग एक साल करके देखें… वात्तकुलान्तक रस दस ग्राम, वच चूर्ण चालीस ग्राम—इनकी अस्सी मात्रा बनाएं। एक-एक मात्रा अमृतम ब्रेन की गोल्ड माल्ट एक चम्मच में मिलाकर सुबह खाली पेट तथा -रात दूध से लें। अश्वगंधारिष्ट दो चम्मच, सारस्वतारिष्ट…

  • आयुर्वेद में हैं रोग परीक्षा के ५००० साल पुराने सूत्र!

    आयुर्वेद में हैं रोग परीक्षा के ५००० साल पुराने सूत्र!

     त्रिविधि रोग परीक्षा चरक ने तीन प्रकार से रोगों की परीक्षा करने का निर्देश किया है-प्राप्तोपदेश, प्रत्यक्ष तथा अनुमान। जिन्होंने पदार्थों के ज्ञातव्य विषयों का साक्षात्कार किया है, उनको प्राप्त (यथा ऋषि) कहते हैं उनके द्वारा रचित ग्रन्थ या वचन को प्राप्तोपदेश कहा जाता है। प्रत्येक विषय में पहले इसी प्रमाण के द्वारा ज्ञान प्राप्त…