आत्मनिर्भरता की प्रेरणा देने वाली पच्चीस “28” महान प्रसिद्ध हस्तियों के विचार…

देश को दमदार बनाने के लिए 
लोकल को वोकल कर स्वदेशी अपनाएं, देश को आगे बढ़ाएं।
और जाने-28 सूत्र स्वास्थ्य के….
स्वदेशी का अर्थ है 
अपने ही देश की अनिर्मित सामग्री या
कच्चा माल (Raw Material)
से वस्तुओं का निर्माण करके अपने
देश और विदेश में बेचना।
अरविन्द घोष, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, वीर सावरकर, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक,
मदनमोहन मालवीय और लाला लाजपत राय स्वदेशी आन्दोलन के मुख्य उद्घोषक (एनाउंसर) थे।

हर शब्द अमृतम-

हमारा तन ही वतन है। दोनों को स्वस्थ रखने का बस एक ही उपाय है-

चीनी कम” अतः चीनी त्यागकर आत्मनिर्भरता को हर हाल में आत्मसात करें।

विदेशी उत्पादों के उपयोग करने से होते हैं, प्यार में भी साइड इफ़ेक्ट…

भारत में अब प्यार भी चाइनीज समान की तरह होता जा रहा है-

चले…. तो चाँद तक नहीं, शाम तक! पहले सच्चा प्यार करने वाले जीवन भर साथ निभाते थे।

लोकल को वोकल करना क्यों जरूरी-
नीचे लिंक क्लिक कर पढ़ें….

【१】पंडित मदन मोहन मालवीय

(काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रेणेता और संस्थापक) आत्मनिर्भरता को क्रांतिकारी जोश मानते थे। श्री मालवीय का कहना था कि आत्मनिर्भर होने से मनोरोगों का नाश हो जाता है। मन में उत्पन्न नवीन विचारों को मूर्तरूप देने से मनोबल बढ़ता है।

देेशवासियों के लिए स्वदेशी का उपयोग पहली प्राथमिकता होना चाहिए। यह देश के सम्मान हेतु बहुत जरूरी है।

【2】सरदार वल्लभ भाई पटेल

 (देश के प्रथम गृहमन्त्री) कहा करते थे कि भारत की माटी में कुछ तो अनूठा है, जो कई बाधाओं के बावजूद हमेशा महान आत्माओं का निवास रहा है।

हमें पराधीनता के पार जाना है

पराधीनता से शर्म-संकोच का भाव

पैदा होकर मानसिक स्वास्थ्य गड़बड़ा जाता है। गुलामी का भाव पैदा होता है।

स्वदेशी के अभाव में विश्वास व्यर्थ है। विश्वास और शक्ति, दोनों किसी महान काम को करने के लिए आवश्यक हैं।

【3】बाल गंगाधर तिलक 

स्वराज और स्वदेशी की अलख जगाने वाले देश के पहले समाजसुधारक थे। देश में सर्वप्रथम गणेश-उत्सव का श्रीगणेश इन्होंने ही किया था। यह उत्सव लोक में मान्य होने के कारण इनका एक नाम लोकमान्य भी है।

उनका मराठी भाषा में दिया गया नारा   स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क 

आहे आणि तो मी मिळवणारच”

अर्थात-स्वराज यह मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर ही रहूँगा बहुत प्रसिद्ध हुआ था। लोकमान्य तिलक को अंग्रेज अशान्ति का नेता कहते थे।

लोकमन्य तिलक ने कहा था….अगर आप रुके और हर भौंकने वाले कुत्ते पर पत्थर फेंकेंगे, तो आप कभी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचेंगे। बेहतर होगा कि हाथ में बिस्किट रखें और आगे बढ़ते जाएं।

देशभक्ति से बड़ा कोई तप नहीं….

लोकमान्य रचित “गीतारहस्य” में लिखा है-धर्म और व्यावहारिक जीवन अलग नहीं हैं। संन्यास लेना जीवन का परित्याग करना नहीं है। असली भावना सिर्फ अपने लिए काम करने की बजाए देश को अपना परिवार बनाकर मिल-जुलकर काम करना है। इसके बाद का कदम मानवता की सेवा करना है और अगला कदम ईश्वर की सेवा करना है।

【4】जमशेद जी टाटा 

(संस्थापक टाटा ग्रुप) टाटा केवल कारोबार नहीं, ये यह व्यवहार और विश्वास भी है।  कोई देश और समाज, अपने कमजोर और असहाय लोगों की मदद से उतना आगे नहीं बढ़ता जितना वो आत्मनिर्भर बनकर अपने बेहतरीन और सबसे बड़ी प्रतिभाओं के आगे बढ़ने से बढ़ता है।

【5】लालबहादुर शास्त्री 

ने जब जय जवान-जय किसान का उदघोष किया, तो समूचा विश्व नतमस्तक हो गया था। दुनिया भारत की दोनों की ताकत से परिचित है। जब देेश में अन्न की कमी हुई, तो नारा दिया कि-देश का उपजा खाएंगे या भूखे मर जायेंगे। सप्ताह मेंं एक दिन का व्रत रखने हेतु आव्हान भी किया था।

 【6】 लोकनायक जयप्रकाश नारायण-

आदमी की आत्मा जब आत्मचिंतन करने लगती है बस, उसी क्षण से आत्मनिर्भरता आरम्भ हो जाती है। दूसरों के भरोसे रहने से आत्महीनता का अनुभव होता है।

【7】श्री दीनदयाल उपाध्याय

ने कहा आज हम स्वतन्त्र देश के निवासी हैं लेकिन
बहुत सी वस्तुओं पर हम अभी पराधीन ही हैं। स्वयं गाओ-गुनगुनाओ, खुद ही अपना उत्सव मनाओ! न सागर तुम पर धावा बोलेगा और न हीं वृक्ष आप पर हमला करेंगे।
ज्यादा बरसात भी मात्र रात में भयभीत
करती है। आत्मनिर्भर बनो!
देश का नवनिर्माण करो।

【8】स्वामी विवेकानन्द

इनकी यह प्रेरणा सबकी स्मृति में आज भी है- भारत को हर हाल में आत्मनिर्भर बनाना है। हमें डरना किससे है। बाहरी कोई दुश्मन है ही नहीं। उठो जागो और तब, तक नहीं रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता।

【9】रवींद्रनाथ टैगोर

देश का राष्ट्रगान “जन, मन, गण” इन्हीं की रचना है। टैगोर कहतें थे कि- आत्मनिर्भरता अनूठा आनन्द है। उन्नति के लिए स्वयं को सदैव ऊर्जावान बनाओ।
महान काम करने का एक ही तरीका है, वो करो जिससे तुम्हें आत्मिक संतुष्टि मिलती है, अगर तुम्हें वह अभी तक नहीं मिली है, तो एक खोजी की तरह पूरे मनोयोग से उस महासत्य को खोजते रहो। संसार की सबसे अनमोल चीज तुम्हारे अंदर ही है। यह मानव जाति की सबसे बड़ी त्रासदी है कि वह अपने अंदर के अनमोल जीवन संगीत को अभिव्यक्त किये बिना कब्र में चला जाता है।

【10】श्री धीरूभाई अम्बानी ‘संस्थापक रिलायंस ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज’ ने बताया था

₹- मेरी सफलता का राज़ मेरी महत्वाकांक्षा और अन्य पुरुषों का मन जानना है।

₹- सही उद्यमशीलता जोखिम लेने और आत्मनिर्भरता से ही आता है।

– आत्मनिर्भर होने का सूत्र...

एक विचार लें और इसे ही अपनी जिंदगी का एकमात्र विचार बना लें। इसी विचार के बारे में सोचे, सपना देखे और इसी विचार पर जिएं। आपके मस्तिष्क , दिमाग और रगों में यही एक विचार भर जाए। यही सफलता का रास्ता है। इसी तरीक़े से अदना सा आदमी विशाल साम्राज्य का शासक बन जाता है। बड़े बड़े लोग तथा आध्यात्मिक धर्म पुरुष आत्मनिर्भरता से ही बनते हैं।[धीरूभाई अंबानी]

【11】 रतन टाटा.

(टाटा ग्रुप के बहुमूल्य रत्नके अनुसार

एक समय में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकि सब कुछ भूल जाओ।
【12】उद्योगपति श्री घनश्यामदास बिरला इनका कहना था कि-पहले हर अच्छी बात का मजाक बनता है फिर विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार लिया जाता है।

【13】ओशो का सूत्र है….

एक अच्छे चरित्र का निर्माण हजारो बार
ठोकर खाने के बाद और आत्मनिर्भर होने  पर ही हो पाता है आत्मनिर्भरता और

अहंकार दोनो ही तुम्हारा सुरक्षा कवच है।

【14】बिलगेट्स का ज्ञान.

यदि क्षणिक सुख चाहते हो, तो गाने सुन लो! यदि एक दिन का सुख चाहते हो,
तो पिकनिक पर चले जाओ।
एक सप्ताह का सुख चाहते हो,
तो यात्रा पर चले जाओ।
1-2 महीने का सुख चाहते हो, तो शादी कर लो। कुछ सालों का सुख चाहते हो, तो धन कमाओ। लेकिन अगर पूरी जिन्दगी भर सुख चाहते हो, तो आत्मनिर्भर बनके अपने कार्य, व्यापार और परिवार से प्यार करो।खुशी के लिये काम करोगे तो खुशी नही मिलेगी लेकिन खुश होकर काम करोगे, तोखुशी और सफलता दोनों मिलेगी।

बहुत से अनगिनत असफल लोगों के विचार भी विचारणीय हैं। जैसे-
【15】 जीवन में ज्यादा दौलत होना

जरुरी नहीं, लेकिन दौलत में जीवन होना बहुत जरुरी है।

【16】नाम और पहचान स्वयं की हो, भले ही छोटी हो।

【17】जो अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति
करने में समर्थ हो वही आत्मनिर्भर है।

【18】 अमृतम विचार….

बिना स्वदेशी अपनाए जीवन बिना पते के लिफाफे की तरह है, जो कहीं नहीं पहुंच सकता। 

【19】संस्कृत की सूक्ति है कि-

शोकस्थानसहस्राणि, 

भयस्थानशतानि च।
दिवसे दिवसे मूढम्,

आविशन्ति न पण्डितम्॥

अर्थात:- दुःख के हजारों कारण हैं, भय के भी सौ कारण हैं, ये दिन-प्रतिदिन पराधीन और मूर्खों को ही चिंतित करते हैं, बुद्धिमानों को कभी नहीं।

【20】जेफ़ बेज़ोस 

(अमेजन के संस्थापक) ने कहा-

आपको ही भविष्य की और देखना होगा।उन्नति के लिए आत्मनिर्भरता आवश्यक है और पता लगाना होगा कि करना क्या है? क्योंकि किसी से शिकायते एवं सरकार से सहायता की उम्मीद करना कोई रणनीति नहीं होती है।

21लाला लाजपतराय 

(पीएनबी बैंक के संस्थापक) स्वदेशी आंदोलन से जुड़ी है- पंजाब नेशनल बैंक  (PNB) बैंक बनने की कहानी स्वदेशी भारतीय ज्वाइंट स्टॉक बैंक की स्थापना में पहला कदम था। आत्मनिर्भरता प्रारम्भ…..फौरन ही क़ागजी कार्रवाई शुरू की गई और इंडियन कंपनी एक्ट 1882 के अधिनियम 6 के तहत 19 मई 1894 को पीएनबी की स्थापना हो गई. बैंक का प्रॉस्पेक्टस ट्रिब्यून के साथ ही उर्दू के अख़बार-ए-आम और पैसा अख़बार में प्रकाशित किया गया।

22】सन्त तुलसीदास

 हमें आत्मनिर्भर होना ही चाहिए, जो व्यक्ति स्वाधीन नहीं होता है उसे स्वजनों से कभी भी सुख नहीं मिलता है।  एक मनुष्य के लिए पराधीनता अभिशाप की तरह होता है। जो व्यक्ति पराधीन होते हैं वे सपने में भी कभी सुखों का अहसास नहीं कर सकते हैं।

23】बहुत से कम पढ़े-लिखे 

विद्वान बड़े काम की बात कह गए, इनका संकलन नहीं है। बस इसे सुनते आये हैं। जैसे-

# आस पराई जो करे वो होतन ही मर जाए। अर्थात-जी दूसरे के भरोसे पर रहता है, वह अंत में भूखा ही मरता है।

एक भरोसा करी का,
क्या भरोसा परी का।

अर्थात- ब्याही हुई घरवाली सदैव सुख-दुख
में साथ निभाती है। दूसरी परी की तरह
बहुत सुंदर हो लेकिन भरोसे लायक नहीं होती।

【24】आत्मनिर्भर आदमी ये ६ सुख पाता है...  संस्कृत के एक श्लोकानुसार-

अर्थागमो नित्यमरोगिता च
प्रिया च भार्या प्रियवादिनी च।
वश्यश्च पुत्रोऽर्थकारी च विद्या
षड्‌ जीवलोकस्य सुखानि राजन्‌॥

अर्थात:-

(1) धन की आय,
(2) नित्य आरोग्य,
(3) प्रिय और मधुर बोलने वाली पत्नी,
(4) आज्ञाकारी पुत्र और
(5) धन देने वाली विद्या,
(6) स्वालंबन होना।
यह इस पृथ्वी के छः सुख केवल आत्मनिर्भरता से मिलते हैं।

25】फेसबुक एवं व्हाट्सएप विश्विद्यालय के विचार हैं कि- 

■ भारत भी आर्थिक महाशक्ति बनकर विश्व को बता सकता है। क्योंकि अब हमारे लिए आत्मनिर्भर बनने का स्वर्णिम अवसर है।

26भारतीयों की भावनाएं…

भारत में निर्मित समान पर राष्ट्रीय ध्वज अंकित होना चाहिए, जिससे ज्ञात कि यह स्वदेशी वस्तु है। सरकार यह नियम बना दे।इससे ग्रामीण अंचल में अत्याधिक लाभ होगा। वैसे हमारी संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम‘ और तेरा मङ्गल, मेरा मंगल सबका मङ्गल होय रे….की है।

27जयतु जयतु भारतम गीत…

देशव्यापी लॉकडाउन के बीच 211 कलाकारों ने मिलकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ से प्रेरित गीत गाया है। इस गाने का पूरा नाम ‘वन नेशन वन वॉइस– जयतु जयतु भारतम’ है। आवाज देने वाले मशहूर गायकों में आशा भोंसले, एस पी बालासुब्रहण्यम, शंकर महादेवन, सोनू निगम और कैलाश खेर जैसे नाम शामिल हैं। इस गाने को प्रसून जोशी ने लिखा है और इस गाने को 12 भाषाओं में तैयार किया गया।

सुर-सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने इस गाने को लेकर एक ट्वीट किया, “ नमस्कार। हमारे बहुत गुणी 211 कलाकारों ने एक होकर आत्मनिर्भर भारत की भावना से प्रेरित इस गीत का निर्माण किया है, जो पूरे भारत की जनता को और हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी जी को हम अर्पण करते हैं।” उन्होंने इस गीत का लिंक भी साझा किया है।

【28】आचार्य चाणक्य…

न विश्वसेत् कुमित्रे च मित्रे चाऽपि न विश्वसेत्।कदाचित् कुपितं मित्रं सर्वं गुह्यं प्रकाशयेत्।।(चाणक्य नीति)

अर्थात- निकृष्ट और पराधीन मित्र कभी विश्वसनीय नहीं होते। आत्मनिर्भरता के लिए अच्छे और हितैषी दोस्त से भी सावधान रहें। क्योंकि अगर अच्छा दोस्त किसी कारणवश आपका दुश्मन बन जाए, तो वह आपकी सभी गुप्त बातों का फायदा उठाकर हानि पहुंचा सकता है।

@ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी..

आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए चार एल (4-L) यानि  लैंड (Land), लेबर, लिक्विडिटी, और लॉ (Low)पर बल देने का एलान  कर इसे देश की उन्नति के लिए प्रमुख शस्त्र बताया।

@ मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्रीय वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा एम.एस.एम.ई को दिए गए पैकेज के संबंध में कहा…यह भारत की आत्मनिर्भरता का पैकेज है! कोरोना से उबारने एवं रोजगार बढ़ाने का विराट अभियान है।

आत्मनिर्भर बनने के लिए स्वस्थ्य रहना भी अति आवश्यक है। आप इन 28 तंदरुस्ती सूत्र अपनाएं। नीचे लिंक क्लिक करें

https://amrutampatrika.com/28swasthwardhaksutra/

सदैव खुश रहने के लिए चन्दन तिलक अपने मस्तिष्क पर जरूर लगाएं-

https://amrutampatrika.com/amrutam-chandan/

वैदिक परम्परा भी आत्मनिर्भर बनाती हैं-

https://amrutampatrika.com/vedamrutam/

सिंधिया परिवार की समझदारी और आत्मनिर्भरता का बेहतरीन जज्बा....

सिंधिया राजघराना सदैव दूरदृष्टि परक रहा है। ग्वालियर शहर को आज से 100-सवा सौ साल पहले महाराजा माधो महाराज ने इंग्लैंड की तर्ज पर बसाकर आत्मनिर्भर बनाया था। आज हमारे यहां छोटी रेल लाइन तभी की है। यह आत्मनिर्भरता का आरम्भ था।

आत्मा का उद्धार और आत्मनिर्भरता

सिंधिया घराने का मूल मंत्र है।

हरि, हरियाली और हर हर हर महादेव  को समर्पित यह राजवंश अत्यंत त्यागी और उदारवादी रहा है। प्रजा की सुख-शांति इनका धेय्य तथा उदघोष रहा।  देशभर में करीब 500 मंदिरों का निर्माण, 50 से ज्यादा धर्मशालाएं, बनारस, पुष्कर एवं मथुरा का सिंधिया घाट आदि अनेक पुराने मंदिरों का जीर्णोद्वार कराया।

ग्वालियर का जयविलास पैलेस, सिंधिया स्कूल, सिंधिया गर्ल्स स्कूल, कमलाराजा कॉलेज, जयारोग्य अस्पताल, आदि अनेक इमारतें इस ईमानदार परिवार की आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं।

मोती वाले राजा के नाम से विश्व विख्यात सर्वधर्म मानने वाले सूर्यवंशी राजवंश के वर्तमान मुखिया महाराजा ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया है। देश का यह अंतिम राजपरिवार है जिसकी वंश परम्परा में अवरोध नहीं आया है। अगली पीढ़ी के कुँवर आर्यमन सिंधिया अभी अपनी माँ महारानी प्रियदर्शिनी के संरक्षण में संस्कारित हो रहे हैं। “हरि अनंत हरि कथा अनंता”  जैसे कहानी-किस्से सिंधिया राज्यवंश की शौर्य-गाथा में गाये जाते हैं।

अभी अभी

विश्व संग्रहालय दिवस पर विश्व-विख्यात मैगजीन ट्रैवलर में सुश्री प्रियदर्शिनी द्वारा

लिखे लेख में ग्वालियर की विशेषताओं का वर्णन बेहतरीन भाषा में किया है।

अमृतम परिवार महारानी सिंधिया को बधाई सहित साधुवाद करता है-इन शब्दों में….

सुश्री प्रियदर्शिनी जी

सधे हुए शब्दों का सन्सार है-आपकी लेखनी।ग्वालियर ही नहीं विश्व का गर्व, सिंधिया वंश की संस्कृति और संस्कारों से सराबोर शब्दों का चयन कर आपने अपनी विन्रम शक्ति को उकेरा है।

शत-शत नमन! आपके लेखन को,

आपकी सादगी को….

ग्वालियर की प्रसिद्धि के लिए 

आपके प्रयास वंदनीय है।

समस्त रहवासी सहयोग कर 

अभिमान की अनुभूति करेंगे। 

!!सादर शिवाय नमः!! 

आत्मनिर्भरता की पहली जंग—

वर्ष 1905 से 1911 तक कलकत्ता से चला  बंग-भंग विरोधी जनजागरण से स्वदेशी आन्दोलन को बहुत बल मिला।

12 दिसम्बर 1930 भारत के स्वदेशी आंदोलन का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। इसे आज भी स्वदेशी दिवस के रूप में याद किया जाता है। इसी दिन शहीद बाबू गेनू ने अपना बलिदान दिया था।

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रोगों का काम खत्म…

स्वदेश में बने अमृतम फार्मास्युटिकल्स, ग्वालियर में बने, बिना रसायनिक तत्वों (केमिकल रहित) आयुर्वेदिक उत्पाद बेहतरीन क्वालिटी, उचित दाम के साथ अत्यंत कारगर और लाभकारी हैं।

हर शब्द अमृतम…

स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के नारे-स्लोगन

ये नारे, जो देश का जज्बा  बढ़ाएंगे

◆ स्वदेशी का लो संकल्प, 

गरीबी हटाने का विकल्प।

◆आत्मनिर्भर बनना मजबूरी नहीं, जरूरी है।

◆ जब स्वदेशी देशवासियों चाहत होगी,
आत्मनिर्भरता से गरीब को राहत होगी।

◆ बेरोजगारी हर अपराध की जननी है।

बस एक यही बात सबको समझनी है,

आत्मनिर्भरता ही है,
तरक्की और समृद्धि का सार।
स्वदेश-स्वदेशी, लोकल है-
जीवन का सार-जीवन के पार।।

स्वदेशी उत्पादक आगे आओ ।
भारत को आत्मनिर्भर बनाओ।।

आत्मनिर्भर बनाने में…

हर पल आपके साथ हैं हम। 

■ वैसे तो भारत में आत्मनिर्भरता बड़ी बात भी नहीं है, परन्तु समस्या जब खड़ी हो जाती है, जब न्यूज़ वाले समस्या के बारे में बताते हैं।और उसे ही हम सच मान बैठते हैं।

■ खुद को खुश रखें...

भारतीयों की परेशानी यह है कि वे, आधा वक्त परिवार को खुश रखने में और शेष समय पड़ोसियों,रिश्ते-नातेदारों एवं नेताओं को प्रसन्न करने में लगा देते हैं। अब आत्मनिर्भरता के लिए टाइम ही नहीं बचेगा।

■ कामगारों के कमेंट्स/व्यंग्य

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि- आत्मनिर्भर, विकास का ही छोटा भाई है। परिवार नियोजन के हिसाब से दोनों में 5 साल का फर्क है। जैसे विकास आज तक पैदा नहीं हुआ वैसे ही हो सकता है कि-आत्मनिर्भरता की भ्रूण हत्या न हो जाये।

■ नमन भारत की नम्रता को....

भारतीय की विद्वता का लोहा विश्व मानता है। यहां लोटा पकड़ने के तरीके से लोग बता देते हैं कि इसका पानी किस काम आएगा।

■ सेल्फ हैंड को सेल्फ डिपेंड बनाएं..

सरकार चाहे, तो आत्मनिर्भर आयोग के साथ-साथ इश्क, प्यार, मोहब्बत, ब्रेकअप मंत्रालय बनाने पर भी विचार करे। आत्मनिर्भरता में यह भी बहुत बड़ा रोड़ा है। आधा से ज्यादा इश्क में इतने फिक्स हो चुके हैं कि वे सेल्फ डिपेंड की जगह सेल्फ हैंड हो चुके हैं।

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