वेदमन्त्रों से होते हैं- 19 फायदे….

वैदिक मन्त्रो से करें तन-मन-अन्तर्मन  

और आत्मा का उपचार। होती है-धन-धान्य की वृद्धि…..

मन्त्र चिकित्सा से तन तो स्वस्थ्य  होता ही है साथ में अन्तरात्मा भी पवित्र हो जाती है।
वेदमन्त्र मुक्तिदायक होते हैं।
मन्त्रों के गुंजायमान से रोज-रोज रुलाने
वाले रोग और रग-रग में रचे-बसे
राग-द्वेष भी रुखसत यानि विदा हो जाते हैं।
ऋषिओं का विज्ञान...
स्वास्थ्य वर्द्धक और विविध कामनाओं
को पूर्ण कर सिद्धि देने वाले वेदोक्त
मन्त्र का चमत्कार!
वेद मन्त्रों में छुपे हैं 19 लाभकारी रहस्य
】आत्मनिर्भर बनने के लिए
】दीर्घायु प्राप्ति के लिए
】व्याधि नाश के लिए
】त्रिदोष सन्तुलित करने के लिए
】मनोबल, आत्मविश्वास वृद्धि के लिए
】सभी डर-भय, चिन्ता विनाश हेतु
】संतान प्राप्ति के लिये
】शत्रु नाश के लिए
】ऐश्वर्य पाने के लिए
१०】महालक्ष्मी की कृपा पाने हेतु
११】सम्मोहन विद्या जानने के लिए
१२】वशीभूत करने के लिए
१३】मनोकामना पूर्ति के लिए
१४】मनोअभिलाषित वस्तु पाने के लिए
१५】प्रारब्ध पापों से पीछा छुड़ातेे हैं।
१६】मनोवकामनाओं की प्राप्ति हेतु
१७】संगीतक बनने के लिए
१८】प्रथ्वी में गढ़ा धन जानने हेतु
१९】स्वर्ण निर्माण की विधि आदि असंख्य जानकारियों का भंडार वेदों में समाया हुआ है।
सामवेद की ऋचाओं में संगीत का
बेशुमार खजाना भरा पड़ा है, जिसे
जानकर व्यक्ति विश्व विख्यात
संगीतकार बन सकता है।
समस्त ब्रह्मांडों का भेद, वेद में छुपा
हुआ है। मान्यता है कि-विश्व का सारा
विज्ञान वेद की ही देन है।
वैदिक मन्त्रो की सहायता से तन्दरुस्त रहना,
तो अत्यन्त लघु बात है। अमृतमपत्रिका परिवार का आग्रह है कि-
पेट के साथ-साथ वेद के भेद को भी समझने का प्रत्यन करें, जिससे डर-भय, शंका, सन्ताप, त्रिदोष का नाश हो।
इम्युनिटी और मनोबल बढ़ाने में वेद मन्त्र बहुत सार्थक हो सकते हैं। 
सभी के विनम्र प्रयास से अरबों वर्ष पुरानी यह प्राचीन धरोहर सुरक्षित रह सकेगी।
वेद” भारतीय साहित्य का प्राम्भिक
सोपान है और ज्ञान का अपरिमित
स्त्रोत भी। वेद 4 हैं।
1-ऋग्वेद
2- यजुर्वेद
3-सामवेद
4- अथर्ववेद
इन सभी वेदों में अनेक ऐसे रहस्यमयी
मन्त्रों का विवरण मिलता है, जो मन की मलिनता, मानसिक संताप, आत्मविश्वास
की कमी जड़ से मिटा देते हैं।
वेद मन्त्रो के जप एवं हवन करने से
सन्सार के सभी भोगों, सिद्धियों की
प्राप्ति होकर अन्त में मनुष्य मोक्ष या
मुक्ति पाता है।
इस लेख में ऋग्वेद के कुछ स्वास्थ्य पूरक प्रमुख मन्त्रों की जानकारी दी जा रही है।
ऋग्वेद की एक ऋचा का अर्थ है कि-
हे मानव! तुम्हें केवल अपने शरीर की देखभाल करना है। शेष कार्य प्रकृति
(माँ अन्नपूर्णा) और शिव कल्याणेश्वर
पर छोड़ दें। प्रकृति-पुराण प्रदत्त परम्पराओं का पालन कर सदैव स्वस्थ्य रहने का प्रयत्न करें। ईश्वर पंचमहाभूतों की पूर्ति के लिए हमेशा से प्रयासरत है, जिससे सारा सन्सार, सृष्टि का संचालन हो रहा है।
 मेधा प्राप्ति के लिए ऋग्वेद में 
एक मन्त्र का उल्लेख है-
सदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काभ्यम्।
सनि मेधामयासिषम।। ऋग्वेद १/१८ !६!
अर्थात-
मैं सभी चर-अचर जीव-जंतुओं,
प्राणियों को सर्वविध भोजन सामग्री,
संसाधन देने वाले सदाशिव का सदैव धन्यवाद दे सकूं।
भोलेनाथ के बारे में पढ़े
मैं सब मनुष्यों को उत्तम -पुण्य के कारण
ऐश्वर्य देने वाले, यथायोग्य फल देने तथा
सन्सार के सभी प्राणियों को प्रसन्न रखने
वाले सभा के स्वामी शिव की उपासना
से प्रतिभा तथा घ्यान धारण करने वाली
मेधा को प्राप्त करूँ।
उपरोक्त ऋग्वैदिक ऋचा का प्रतिदिन जाप
करने से मेधा शक्ति की प्राप्ति होती है,
इसमें कोई शंका न करें।
मेधा का अर्थ है-
अंग्रेजी में इसे मेरिट (MERIT) कहते हैं।
सोचने समझने और निश्चय करने की वृत्ति या मनोबल, मानसिक शक्ति,धारण शक्ति, बुद्धि
या वह विशिष्ट गुण जिससे मनुष्य किसी काम को करने की विशेष योग्यता मेधा 
कहलाती है।
ॐ के जाप से भी बढ़ती है इम्युनिटी…
जानने हेतु लिंक क्लिक करें
 कैंसर, मधुमेह जैसे असाध्य रोग
और कोमा यानि मृत्यु शैया ओर पड़े
मरीजों की रक्षा के लिए वेद मन्त्र….
यथा युगं वरत्रया नद्यन्ति धरूणाय कम।
एवा दाधार ते मनो जीवातवे न 
मृत्यवेऽघोअरिष्टतातये।।
न्य ग्वातोऽववाति न्यक्तपतिसूर्य:
नीचीनमध्-न् या दुहे न्यग्-भवतु ते रप:।।
ऋग्वेद १०/६०/ !!८!!-!!११!!
अर्थात-
जिस प्रकार रथ जोतने के लिये
सारथी जुए को बाँध देता है। उसी तरह महादेव ने हमारे प्राणों को बांध दिया है, ताकि हमारा अवसान
एवं नुकसान न हो।
शिव वचन है- सन्सार के सभी
प्राणी हर हाल में स्वस्थ्य रहो।
जिस तरह वायु/हवा नीचे की तरफ
बहती है, सूर्य अपनी स्वास्थ्यवर्द्धक
किरणें प्रथ्वी को ओर बिखेरता है,
कामधेनु गाय का दूध नीचे की तरफ
टपकता है, उसी प्रकार शिवभक्ति से
तुम्हारी सारी आधि-व्याधि गिरती चली
जाए। कभी कोई रोग न सताए।
ऋग्वेद त्रिकालदर्शी ऋषियों ने
बताया है कि-
इस वेद सूक्त का एकाग्रचित्त होकर
एक माला रोज जाप करने और
अमृतम त्रिकटु चूर्ण युक्त
हवन सामग्री से होम-हवन करने से मरणासन्नकोमा में गए – रोगी को आरोग्यता की प्राप्ति होती है।
वह मृत्यु पथ से मुक्ति पाता है।
गुरु गोरखनाथ ने इस सूक्त द्वारा
अनेकों असाध्य विकारों को ठीक किया था।
बड़ी से बड़ी बीमारियों का दुष्प्रभाव ऋग्वेद की इस ऋचा या सूक्त से साफ हो जाता है।
यह परमशिव साधक गुरु गोरखनाथ का वचन है! कभी खाली नहीं जाएगा। 
 
स्वस्थ्य रहने के लिए मस्तक यानि माथे पर चन्दन तिलक लगाएं-
 
स्वस्थ्य रहने के लिए जाने 28 सूत्र…
जगतगुरु हनुमानजी को भी नमन 
करना न भूलें
कलयुग में चराचर जीव-जगत के
जीवन की जबाबदारी हनुमानजी पर है।
माँ अंजना के आशीर्वाद फलस्वरूप
इन्हें चिंरजीवी होने का वरदान प्राप्त है।
पवनपुत्र के चमत्कार की चर्चा चलचित्रों
से लेकर ग्रन्थ-पुराणों में मिलती है।
इन्हें चन्दन की जगह सिन्दूर का चोला चढ़ाने की परम्परा है। इनकी भक्ति से तन-मन चमक जाता है।

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