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अदरक – खाएं बेधड़क, जाने 14 फायदे
अदरक के ओषधि गुण और चमत्कार संस्कृत में इसे आद्रिकम्य, आद्रशाक, पंजाबी में अदरख कहते हैं। यह जमीन के अंदर पूरे हिंदुस्तान में पैदा होता है। इसकी जड़ में एक प्रकार का कंद होता है, उसे अदरक कहा जाता है। अदरक एक कफ नाशक ओषधि के रूप में बहुत चलन में है। अदरक के बारे…
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अतीस एक विषनाशक बूटी
सुश्रुत, बागभट आदि आचार्यों ने अतीस की जड़ को सर्प-नाग और बिच्छू के विष को नष्ट करने वाली बताया है। अतीस बच्चों के लिए अत्यंत गुणकारी ओषधि है। अकेली अतीस को पीसकर इसका पावडर 50 से 100 mg रोज मधु पंचामृत के साथ चटाने से बालकों के 100 अधिक दोष मिट जाते हैं।
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पुराना मधुमेह नाशक- अतिबला
जो संसार का करे भला- उसका नाम है अतिबला गुणों के कारण अतिबला के आगे देवता भी शीश झुकाते हैं। यह मधुमेह नाशक अद्भुत ओषधि है। वनोषधि चंद्रोदय के रचयिता वेद्याचार्य श्रीचंद्रराज भंडारी ‘विशारद’ के अनुसार अतिबला के बीज और सारा वृक्ष मूत्रल शांतिदायक है। मूत्र-सम्बन्धी बीमारियों में, पुराने अतिसार में, जीर्ण ज्वर में एवं सूतिका रोग…
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क्या आपको मालूम है- सर्वप्रथम भगवान भोलेनाथ ने ही कि थी गुरु-शिष्य परम्परा की शुरुआत
भगवान शिव के 10 परम शिष्य शिव के 10 परम शिष्य के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। सभी सनातन धर्मियों को इन शिवभक्तों के प्रति पूर्ण आस्था और श्रद्धा रखना हमारा परम कर्तव्य है। तत्काल तकलीफ मिटाये- घोर परेशानियों के समय इन शिव शिष्यों का स्मरण करने से कष्ट तत्काल कट जाते हैं।…
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13 फायदे वाला फल और गर्मियों में- नकसीर की बेहतरीन दवा अन्जीर के बारे में दुर्लभ खोज पहलीबार
तन की ठीक करे तासीर– अंजीर संस्कृत में अन्जीर को “काकोदुम्बरिका“ और पंजाबी में किमरी फग कहते हैं। यह दो प्रकार का होता है। पहला बोया हुआ और दूसरा जंगली। अन्जीर के फल और पत्ते अन्जीर के पत्ते बड़े एवं ऊपर से अधिक कुरकुरे होते हैं। इसका पेड़ 8 से 9 फिट ऊंचा होता है। तोड़ने…
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अजवायन के अजूबे
अजवायन– रोगों के लिए डायन इसे यवानी खाण्डव भी कहा जाता है। दुनिया में इसे मसलों के रूप में विशेष रूप से उपयोग करते हैं। अजवाइन एक पाचक और रुचिकारक ओषधि के रूप में लाखों वर्षों से उपयोग की जा रही है। संस्कृत के एक श्लोक में कहा गया है- !!एकायवानीशतमन्नपाचिका!! अर्थात- अकेली अजवाइन ही पेट…
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स्किन डिसीज़ में उपयोगी अंगूर
अघोरी की तिजोरी से –अंगूर के फायदे बसन्त ऋतु यानी फरवरी माह में अंगूर की कच्ची लकड़ी के अंदर से एक प्रकार का रस-पदार्थ निकलता है जिसे देशी भाषा में मद कहते हैं, इस मद को पुराने से पुराने त्वचा रोगों जैसे-दाद, खाज, खुजली, एग्जिमा, फोड़े-फुंसी, सफेद दाग-धब्बे पर लगाने से बहुत आराम मिलता है।…
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दुर्भाग्य क्या है? और इसका कारक ग्रह कौन है तथा क्या आप राहु के 4 मंदिरों के बारे में जानते हैं?
दुर्भाग्य किसे कहते हैं? दुर्भाग्य का अर्थ है- जो लोग मेहनत, भाग-दौड़ से दूर भागते हैं, उनसे भाग्य दूर हो जाता है। इसे ही दुर्भाग्य कहते हैं। आलस्य-प्रमाद, सुस्ती और दूरदृष्टि की कमी के कारण जीवन परेशानियों से घिर जाता है। दुर्भाग्य का कारण– पूर्व जन्म के पाप-पश्चाताप, माँ, बहिन, पत्नी या अन्य दुर्गा स्वरूप…
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अखरोट के चमत्कार
अखरोट के चमत्कार अखरोट के पत्तो का काढ़ा पीने ओर उसी काढ़े से कण्ठमाला की गांठ ढने से 7 दिन में कण्ठमाला रोग दूर हो जाता है। दाद का शर्तिया इलाज अखरोट की गाड़ी सुबह उठते ही बसी मुहं चबाजर दाद पर लगाने से वह मिट जाती है है।
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जादुई ओषधि अकरकरा
जड़ीबूटियों की जादूगरी अघोरी साधु जड़ीबूटियों की दम पर अनेकों चमत्कार दिखाते हैं। काशी के शमशानेश्वर पर मिले एक अघोरी साधक मुहं में अंगारे भरकर अद्भुत खेल दिखाने में माहिर हैं। कैसे रखते हैं मुहं में अंगारे- अकरकरा इसे अकलतरा भी कहते हैं और साथ में नोसादर दोनों बराबर मात्रा में पीसकर तालु और मुख…
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