Category: Amrutam Daily Lifestyle

  • समर्पण या आक्रमण दोनों में क्या सही है?..

    समर्पण या आक्रमण दोनों में क्या सही है?..

    अमृतमपत्रिका, ग्वालियर द्वारा साभार… शास्त्रों के मुताबिक शक्तियां तीन ही है। अध्यात्मिक शक्ति, आदिदैविक और भौतिक। महत्व तीनों का है। क्योंकि ये सभी ऊर्जावान, शक्तिप्रदाता हैं। प्रकृति का संतुलन इसी पर निर्भर है।  शक्ति समर्पण में है-आक्रमण में नहीं। ईश्वर को सन्सार-सृष्टि की शक्ति का घोतक माना जाता है। क्योंकि वह सन्सार के लिए समर्पित…

  • मेथीदाना- कामशक्ति बढ़ाये, खून साफ करी तथा स्तनों को सुडौल बनाता है। फायदे जानकर आप भी खएँगे…

    मेथीदाना- कामशक्ति बढ़ाये, खून साफ करी तथा स्तनों को सुडौल बनाता है। फायदे जानकर आप भी खएँगे…

    मेथीदाना एक गर्म ओषधि है, इसे केवल सर्दी के मौसम में सेवन करना हितकारी है। गर्मी में मेथीदाना खाने से कब्ज की शिकायत हो सकती है। कामशक्ति वृद्धिकारक भी होती है मेथी। हजारों वर्ष प्राचीन एक ग्रन्थ में मैथी का संस्कृत में एक श्लोक लिखा है- मेथिकामेथिनी मेथी दीपनी बहुपत्रिका। बोधिनी बहुबीजा च ज्योतिर्गन्धफला तथा।।…

  • हल्दी या हरिद्रा सोलह रोगों से बचाती है…

    हल्दी या हरिद्रा सोलह रोगों से बचाती है…

    हल्दी या हरिद्रा के 16 चमत्कारी फायदे हैं… 【१】भावप्रकाश एवं द्रव्यगुण विज्ञान आदि आयुर्वेदिक ग्रन्थों के अनुसार बहुत अल्प मात्रा में हल्दी का रोज सेवन किया जाए, तो अनेकों तरह की एलर्जी से बचाव रहता है। 【२】नेत्र-मुख रोगों में हल्दी विशेष लाभदायक है। 【३】हल्दी को दरिद्र भी कहते हैं। हरिद्रा शरीर की आद्रा यानी सर्दी-जुकाम,…

  • डेन्ट और आंत ये शरीर के मुख्य हिस्से है। इनको स्वस्थ्य कैसे रखें- जाने

    डेन्ट और आंत ये शरीर के मुख्य हिस्से है। इनको स्वस्थ्य कैसे रखें- जाने

    अमृतमपत्रिका द्वारा 11 से अधिक आयुर्वेदिक ग्रन्थों से खोजे गए जाने 11/ग्यारह उपचार… स्वस्थ्य तन- स्वच्छ वतन के लिए जाने जरूरी बातें ब्रिटिश डेंटल जर्नल में प्रकाशित एक शोध में पाया कि दन्त समस्याओं से जूझ रहे लोगों में कोविड-19 के गम्भीर लक्षण अधिक पाए गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिसर्च में पाया कि मुख में…

  • सफलता, सिद्धि-समृद्धि, सुखी जीवन के कारक हैं- शिवलिंग स्वरूप शिव..

    सफलता, सिद्धि-समृद्धि, सुखी जीवन के कारक हैं- शिवलिंग स्वरूप शिव..

    सरकारी नोकरी का सम्बन्ध सूर्य से है और सूर्य की कृपा पाने के लिए अंधे लोगों की मदद करना चाहिए। सूर्य की शांति हेतु नन्दी या साढ़ को नित्य 4 मोटी रोटी में घी हल्दी लगाकर, उस पर धि रखकर रोज नियम से खिलाना श्रेष्ठ रहता है। सुबह सूर्योदय के समय जल में हल्दी, केसर…

  • खट्टी डकारें, अपच मिटाते हैं-13 मसाले

    खट्टी डकारें, अपच मिटाते हैं-13 मसाले

    जाने- रोगनाशक मसालों के बारे में… खट्टी डकारें, अम्लपित्त, पित्तदोष, त्रिदोष, गैस, कब्ज, एसिडिटी, यकृत की कमजोरी, कर्कट रोग (कैंसर), पेटदर्द, आँतों की खराबी और पेटदर्द आदि अनेक पेट/उदररोग से मुक्ति दिलाकर इम्युनिटी बढ़ाते हैं– भारतीय आयुर्वेदिक 13/तेरह मसाले…… अतः सब्जी के साथ दम से खाएं। क्योंकि सब्जी में सबका जी रहता है। पाचनतंत्र के…

  • सफलता, समृद्धि-सम्पदा, धन बढ़ाने के लिए शुक्र को कैसे प्रसन्न करें?…

    सफलता, समृद्धि-सम्पदा, धन बढ़ाने के लिए शुक्र को कैसे प्रसन्न करें?…

    ■ जन्मपत्रिका का शुक्र की स्थिति…. ■ दीपावली की रात दीपदान का क्या रहस्य है?… चांदी के छल्ले या अंगूठी के बारे में भय-भ्रम मिटाने वाली 73 रोचक और अदभुत जानकारी पढ़ें… ■ क्यों दीपावली उत्सव के कारक हैं-शुक्राचार्य?… ■ क्या चांदी पहनने से समृद्धि आती है? ■ क्या शुक्र ग्रह बिना रत्न के भी बलवान हो…

  • क्या पैसा पाने के लिए छठी इन्द्रिय जागृत करना जरूरी है अथवा धन ही छठी इन्द्रिय है।

    क्या पैसा पाने के लिए छठी इन्द्रिय जागृत करना जरूरी है अथवा धन ही छठी इन्द्रिय है।

    पैसा ही कलयुग में छठी इन्द्रिय है। जाने धन के 52 से अधिक चमत्कार! क्योंकि जीवन 52 पत्तों की तरह है, जिसके पत्ते लग गए या अच्छे आ गए, वही पल में अम्बानी, बिलगेट्स बन जाता है। शिव सन्त सही कहते हैं- मैं अति दुर्बल मैं मतिहीना, जो कछु कीन्हा, शम्भू कीन्हा। कहा गया है…

  • पेट की सफाई कैसे रखें..

    पेट की सफाई कैसे रखें..

    पेट खराबी, कब्ज, गैस की समस्या से होते हैं- 25 तरह के खतरनाक रोग…. आयुर्वेद की कभी भी कोई भी जड़ीबूटी, देशी दवा या घरेलू उपायों से हो सकता है-शहर्रिर को भारी नुकसान। अतः बिना जाने-समझे, सन्दर्भ ग्रन्थ पढ़े बिना कतई भरोसा न करें। आजकल गूगल पर अनेको भ्रमित करने वाली जानकारियों का भंडारण हो…

  • तन-मन को संक्रमण और बीमारियों से बचाना है, तो सप्ताह में 2 बार मालिश-मसाज या अभ्यङ्ग अवश्य करें…शास्त्रमत यह ज्ञान पहली बार पढ़ें…

    तन-मन को संक्रमण और बीमारियों से बचाना है, तो सप्ताह में 2 बार मालिश-मसाज या अभ्यङ्ग अवश्य करें…शास्त्रमत यह ज्ञान पहली बार पढ़ें…

     अभ्यङ्ग के अनुभव, चमत्कारी लाभ- अपने पूरे जीवन में शरीर की मालिश करने वाले डा॰ हरिकृष्णदास एम॰ ए॰ ने अपने अनुभवों में लिखा है कि संक्रमणों तथा बीमारियों से बचने के लिए मालिश अति आवश्यक उपक्रम है। स्वस्थ्य-प्रसन्न औऱ लम्बी निरोग जीवन के लिए सप्ताह में कम से कम एक से दो बार मसाज अवश्य…