• हे माँ..तुझे शत-शत नमन

    हे माँ..तुझे शत-शत नमन

    भुवनेश्वरी सहिंता में कहा गया है- यथा वेदों …..तद्वतसप्तशती स्मृता वेद की तरह दुर्गा सप्तशती भी अनादि है अपौरुषेय है। मार्कंड़य पुराण के अंतर्गत होते हुए भी ऋषि मार्केंडेय इसके रचनाकार न होकर मन्त्रद्रष्टा ऋषि हैं। उन्होंने अपने ध्यान-साधना में देवी के जिन रूपों और चरित्रों का साक्षत्कार किया वही इसमें वर्णित है। माँ शक्ति के…

  • नवरात्रि पर दिलचस्प दुर्लभ जानकारी

    नवरात्रि पर दिलचस्प दुर्लभ जानकारी

    शिव हो या शिवा खोजने से नहीं, खो-जाने से मिलते हैं। सन्सार में केवल पूर्ण है, तो केवल मां ही है। मां में जगत बसता है। माँ सदा से ही पूर्ण है। भारतीय संस्कृति के अनुसार हर महीने पूर्णिमा तिथि आती है। शास्त्रों में देवी दुर्गा शक्ति न स्त्रीलिंग है न पुरुष है और नाहीं नपुंसक है। मां भगवती को हम…

  • नवरात्रि में घटस्थापन कैसे करें

    नवरात्रि में घटस्थापन कैसे करें

    विभिन्न कामनाओं के लिए कलश स्थापना और अनुष्ठान सम्बन्धी वैदिक नियम….. एक बार यह नियम-विधान अपनाकर देखें। जीवन चमत्कारी होने लगेगा। इस लेख को तैयार करने में 55 से अधिक पुराने ग्रंथो का अवलोकन तथा अध्ययन किया है।   महाविद्या सूत्र और भुवनेश्वरी सहिंता आदि ग्रंथों के अनुसार नवरात्रि में दुर्गापाठ के समय कलश स्थापना और अखण्ड ज्योत का विशेष महत्व…

  • दुर्गा शप्तशती रहस्य के अनुसार शरीर की रचना

    दुर्गा शप्तशती रहस्य के अनुसार शरीर की रचना

      जाने तन के वह वैदिक भाषा में अठ्ठारह अंग जो बहुत ही महत्वपूर्ण हैं….. इन्टरनेट पर यह अदभुत, दुर्लभ और दिलचस्प जानकारी पहली बार आप पढ़कर रोमांचित हो जाएंगे। इस विशेष लेख में वेद व संस्कृत भाषा के बहुत ही कठिन शब्दों को सरल भाषा में लिखने का विनम्र प्रयत्न किया है। लेख मनमाफिक लगे, तो अपने कमेंट्स…

  • शरीर में इन 18 स्थानों पर होता है ऊर्जा का विशेष प्रवाह

    शरीर में इन 18 स्थानों पर होता है ऊर्जा का विशेष प्रवाह

    जाने तन के वह अठ्ठारह अंग जो  बहुत ही महत्वपूर्ण हैं…..   शांडिल्य उपनिषद में शरीर के 18 मर्म स्थान बताये गये हैं — 【१】पदतल यानि पैरों के तलबे 【२】पादांगुष्ठ यानि पैरों के अंगूठा 【३】गुल्फ यानि पैरों के ऊपर एड़ी के ऊपर की गांठ, गट्टा, इसे टखना भी कहते हैं। 【४】जंघा यानि जांघ घुटने के ऊपर तथा पेट के…

  • दान का वैदिक महत्व

    दान किसको करें भीतेभ्यश्चाभयं देयं, व्याधितेभ्यस्तथौषधम्। देया विद्याथिने विद्या, देयमन्नं क्षुधातरे।। इस लोक  और परलोक में सुख प्राप्ति के लिए चार दान श्रेष्ठ बनाएं है – 1. भयभीत को अभयदान 2. रोगी को औषधिदान 3. विद्यार्थी को विद्यादान 4. और भूखे को अन्नदान।

  • शिव के इस सन्सार में सभी सुखी कैसे रहें

    शिव के इस सन्सार में सभी सुखी कैसे रहें

    संसार में ऐसी कोई वस्तु नहीं है जो हमें सदा सुखी और स्वस्थ्य रख सके……. जब शरीर ही हमें सुख नही देता है, तो अन्य वस्तुओं से, विषयों और भोगों से सुख कैसे पा सकते है। जब हम पूर्णतः स्वास्थ्य नहीं रह सकते तो जीवन का सुख कैसा? दुःख की 84 लाख योनियां हैं…… हमें…

  • प्रकृति का अनमोल अमृत…

                   !!अमृतम!! मधु पंचामृत “भूतेषु-भूतेषु विचित्य धीरा: ”  जैसे एक मधुमक्खी फूलों की क्यारी में जाकर प्रत्येक फूल से केवल उसका रस ग्रहण करती है। फूल का ज्यों का त्यों छोड़ देती है। फूल पर बैठी जरूर, लेकिन उससे केवल रस ले लिया। कड़े परिश्रम पश्चात अनेक फूलों के…

  • मनुष्य ऋण पार्ट-3

    मनुष्य ऋण पार्ट-3

    मातृऋण, पितृऋण के अलावा मनुष्य ऋण भी चुकाना पड़ता है हर इंसान को..   जाने क्या होता है……मनुष्य ऋण–   हमारा पालन-पोषण करने वाले माता-पिता के अलावा अन्य मनुष्यों ने हमें प्यार दिया, दुलार दिया। समय-समय पर मित्र के रूप में हमारा मार्गदर्शन कर हमारी सहायता की। जिनके साथ हमने मस्ती मारी। वे लोग जिन्होंने…

  • अपने घर में लगाएं ओषधियाँ

    स्वस्थ्य रहने के लिए अपनी वाटिका को बनाये बूटियों से लबालब.. अपने घर की छत पर कुछ पौधे ऐसे हैं, जिन्हें लगाकर आप अपनी रोगप्रतिरोधक क्षमता यानि इम्युनिटी पॉवर बढ़ा सकते हैं- निम्नलिखित पौधे स्वास्थ्य वर्धक के साथ-साथ धन वृद्धिदायक भी हैं- तुलसी….. यह 5 तरह की होती है। इसकी विशेषता यह है कि कभी इस…

Talk to an Ayurvedic Expert!

Imbalances are unique to each person and require customised treatment plans to curb the issue from the root cause fully. Book your consultation – download our app now!