• यकृत यानि लिवर और पेट के रोगों की अचूक और अद्भुत ओषधि…

    यकृत यानि लिवर और पेट के रोगों की अचूक और अद्भुत ओषधि…

    आपके शरीर को बनाये जो नया उसका नाम है– पुनर्नवा   यकृत यानि लिवर और पेट के रोगों की अचूक और अद्भुत ओषधि…  !! शरीर पुनर्नवं करोति इति पुनर्नवा !! तन-मन, लिवर और पेट को फिर से नया-नवीन करने के लिए तथा जीवन को पुनः पुनर्जीवित करने के लिए पुनर्नवा जड़ी-बूटी चमत्कारी है। इसलिए आयुर्वेद के…

  • महिलाओं के लिए संदेश

    महिलाओं के लिए संदेश

    लड़कियों के बेजान तन-मन में उमंग भरने वाला एक आयुर्वेदिक उत्पाद…   नई उम्र की लड़कियों के स्वास्थ्य और सौन्दर्य के लिए 100 फीसदी आयुर्वेदिक ओषधि… नांरी सौंदर्य माल्ट १०० फीसदी आयुर्वेदिक टॉनिक रोगों का रायता… आधुनिक जीवन शैली के चलते और आपाधापी की वजह से आजकल लड़कियों का अंदरूनी सिस्टम काफी गड़बड़ा गया गया…

  • कैसे करें जुकाम का काम- तमाम

    कैसे करें जुकाम का काम- तमाम

    नये-पुराने और जिद्दी यानि क्रोनिक जुकाम का जरूरी है- पक्का इलाज…   बदलते मौसम के चलते लोगों को कई तरह की बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती हैं. ख़ासतौर से खांसी, जुखाम और बुखार ने ज़्यादातर लोगों को परेशान किया हुआ है. कई लोग, इन छोटी-छोटी बीमारियों पर न ध्यान देते हुए किसी भी मेडिकल…

  • जाने तन रक्षक त्राण क्या होते हैं

    सात त्राण – बचाएं प्राण…   पहले समय में युद्ध के समय त्राण का उपयोग सैनिक या योद्धा के प्राणों की रक्षा के लिए किया जाता था। यह सात प्रकार के होते थे। 【१】अंगत्राण… अंग की रक्षा करने वाला आवरण, बख़्तर, कवच तथा वस्त्र। 【२】अंगुलित्राण…. इसे अंगुश्ताना, दस्ताना भी कहते हैं। खास चमड़े से बना…

  • तन्त्र के रहस्य क्या हैं

    तन्त्र के रहस्य क्या हैं

    तन्त्र में मारण, उच्चाटन, वशीकरण और सम्मोहन क्या होता है। इससे क्या लाभ या हानि है जाने इस अदभुत लेख में….. तन्त्र-मन्त्र-यन्त्र भारत की प्राचीन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। आदिकाल से ही तन्त्रविधा का प्रयोग होता चला आ रहा है। इन सबकी अधिष्ठात्री माँ चण्डिका और महाकाली हैं इन्हीं की अन्य शक्तियां जैसे- छिन्नमस्ता, बागम्भरी, बगुलामुखी, तारा और माँ कामाख्या हैं। तेरा तुझको अर्पण…. इस लेख…

  • माँ तेरे रूप अनेक

    माँ तेरे रूप अनेक

    महामाया की विचित्र माया…. 【१】दुर्गोपासना कल्पद्रुम 【२】देवी पुराण 【३】त्रिपुरा रहस्य नामक प्राचीन पुस्तकों में उल्लेख है कि… ■ वशीकरण की देवी माँ सरस्वती है ■ स्तम्भन की शक्ति देवी लक्ष्मी है। ■ विद्वेषण की ज्येष्ठा यानि धुमेश्वरी या दरिद्रा है ■ उच्चाटन की देवी माँ दुर्गा है। ■ मारण की माँ महाकाली है। यह जीवन…

  • दुर्गोपासना और दुर्गा पाठ किस प्रकार करना चाहिए

    दुर्गोपासना और दुर्गा पाठ किस प्रकार करना चाहिए

      दुर्गापाठ के समय रखें “७” बातों का ख्याल, तो हो जाएंगे मालामाल…. यत्रैतत्पठ्यते सम्यङ्  नित्यमायतने मम। सदा न तद्विमोक्ष्यामि  सान्निध्यं तत्र में स्थितम !!८!! अर्थात-दुर्गा पाठ करते समय सही तरीके यानि सम्यक से अर्थ समझकर शुद्ध उच्चारणपूर्वक पढ़ना चाहिए। पाठ करते समय ब्राह्मण या साधक से त्रुटि न हो, उच्चारण में अशुद्धि न हो। पाठ में प्रत्येक मन्त्र का यतार्थ…

  • पिछले ब्लॉग में ॐ के बारे में बताया था इस लेख में जाने माँ चण्डिका कौन है-

    पिछले ब्लॉग में ॐ के बारे में बताया था इस लेख में जाने माँ चण्डिका कौन है-

        ।। ‘ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे‘ ।।   भाषाशब्द कोष और संस्कृत व्याकरण टीका के अनुसार चण्ड का अर्थ- प्रचण्ड, उग्र, आवेश युक्त, उष्ण, फुर्तीला और सक्रिय बताया गया है। अतः माँ चण्डिका का यह रूप स्मरण करने का उद्देश्य यह भी है कि माँ अपने भक्त के कष्ट का निवारण कर अभीष्ट साधन में…

  • ७ अक्षर का चमत्कारी मन्त्र

    ७ अक्षर का चमत्कारी मन्त्र

    बहुत कम समय में सिद्धि-समृद्धि सुख-सफलता और अच्छा स्वास्थ्य पाना चाहते हो, तो इस लेख का अनुसरण अवश्य करें! !!ॐ!! के बारे में दुर्गा सप्तशती में बताये गए हैं- चमत्कारी प्रभाव और रहस्य…   इस लेख में केवल !!ॐ!! के विषय में  लिखा गया है। अगले ब्लॉग में   !!नमश्चचण्डीकायै!! के रहस्य जाने–   दुर्गा सप्तशती का प्रथम चरित्र…

  • महाकाली कलकत्ते वाली

    महाकाली कलकत्ते वाली

       क्यों कहते हैं दुर्गा …. आयुर्वेद ग्रंथो के अनुसार देवी के दुर्गा नाम के सम्बंध में कहा जाता है कि- शरीर रूपी दुर्ग में निवास करने का कारण दुर्गा है। शास्त्रों में लिखा है- दुर्गम नामक दैत्य को मारने के कारण दुर्गा है। तन्त्रचार्य कहते हैं- मनुष्य के लिए कठिन से कठिन दुर्गम कार्य…

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